डा. सुशीला तिवारी अस्पताल और मेडिकल कालेज के खाते से 20 लाख 63 हजार 999 रुपये निकाले जाने से पंजाब नेशनल बैंक और कालेज प्रशासन सकते में है।
पुलिस का मानना है कि एसटीएफ इस मामले में बैंक के साथ ही कालेज प्रशासन की जांच करेगी कि चेक पर दस्तखत किसने किया। कालेज से कोई भितरघात तो नहीं हुआ या बैंक के किसी कर्मचारी की मिलीभगत तो नहीं।
आशंका यह भी है कि चेक बुक का क्लोन बनाया गया होगा। बरेली रोड स्थित पीएनबी की शाखा से शनिवार दोपहर फोन आने पर कालेज प्रशासन को जालसाजी की जानकारी मिली थी। बैंक के शाखा प्रबंधक ने प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत से पूछा तो पता चला कि खाते में 31 लाख रुपये हैं। कालेज की चेकबुक उनके (प्राचार्य) पास है।
जांच में आया कि कालेज के खाते से आठ अक्तूबर से भुगतान हो रहा है। बिहार, दिल्ली और मेरठ स्थित विभिन्न बैंकों से 19 चेकों द्वारा 31 अक्तूबर तक 20 लाख 63 हजार 999 रुपये निकाले गए हैं।
आशंका है कि इस कार्य में साइबर क्रिमिनल्स का बड़ा गैंग काम कर रहा है। शाखा प्रबंधक ने दिल्ली स्थित मुख्यालय को घटना से अवगत कराया। इसके बाद कालेज का खाता सीज कर दिया गया।
प्राचार्य ने घटना की लिखित जानकारी एसएसपी स्वीटी अग्रवाल को दी। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज किया। एसएसपी ने घटना की जांच एसटीएफ से कराने के लिए मुकदमा ट्रांसफर करने के निर्देश दिए हैं।