नेहरू राजकीय इंटर कालेज महुआडाबरा (जसपुर) के प्रधानाचार्य को विजिलेंस विभाग की टीम ने गुरुवार को 15 हजार रुपए घूस लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि प्रधानाचार्य ने सहायक अध्यापक व्यायाम के एरियर और बोनस का बिल पास करने के एवज में घूस मांगी थी। प्रधानाचार्य को गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस विभाग के कार्यालय में रखा गया है।
विजिलेंस विभाग के एसपी पंकज भट्ट ने पत्रकारवार्ता में बताया कि राइंका महुआडाबरा के सहायक अध्यापक व्यायाम गनपति सिंह ने 10 फरवरी को लिखित शिकायत दी कि उनके एरियर और बोनस बिल के लगभग दो लाख 40 हजार रुपए का भुगतान कराने के लिए प्रधानाचार्य ऋषिपाल रवि 15 हजार रुपए घूस मांग कर रहे हैं। पैसा नहीं देने के कारण अक्तूबर से उनके बिल पास नहीं किए हैं।
इस पर एसपी ने इंसपेक्टर दिवानी राम आर्या से इस मामले की जांच कराई। इसके बाद प्रधानाचार्य को पकड़ने के लिए विजिलेंस निदेश् मंजूरी मिलने के बाद एसपी पंकज भट्ट ने प्रधानाचार्य को पकड़ने की योजना बनाई। सहायक अध्यापक ने बृहस्पतिवार को जैसे ही बतौर घूस 15 हजार रुपए प्रधानाचार्य को दिए, उसी समय विजिलेंस टीम ने प्रधानाचार्य को रंगेहाथ पकड़ लिया। प्रधानाचार्य के हाथ में एक-एक हजार रुपए के 15 नोट मौजूद थे, जिस समय यह कार्रवाई हुई उस समय स्कूल में गृह परीक्षाएं चल रही थीं।
आरोपी प्रधानाचार्य के हाथ पानी में डुबोने पर लाल हो गए। प्रधानाचार्य के खिलाफ हल्द्वानी में धारा 7/13(1)डी, सपठित 13(2) भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। एसपी ने बताया कि शिकायतकर्ता अध्यापक 2013 से 2014 तक विभाग द्वारा निलंबित था जिसके बाद उसकी बहाली हो गई। वहीं, विजिलेंस टीम को निदेशक विजिलेंस ने पांच हजार रुपए पुरस्कार देने की घोषणा की है।
जिसे निलंबित कराया, उसी ने सलाखों के पीछे भेजा
मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा निवासी गिरफ्तार प्रधानाचार्य ऋषिपाल ने बताया कि श्यामनगर (बाबरखेड़ा) ऊधमसिंह नगर निवासी शिकायतकर्ता सहायक अध्यापक गनपति सिंह ने पौड़ी जिले के कमांदा से प्रधानाचार्य का फर्जी हस्ताक्षर कराकर यहां स्थानांतरण करवाया था। विभाग में शिकायत के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले में उन्होंने लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाया तो शासन ने गनपति सिंह को निलंबित कर दिया। प्रधानाचार्य ने कहा कि जिस अध्यापक को उन्होंने फर्जीवाड़े के आरोप में निलंबित करवाया, उसने साजिशन घूस देकर उन्हें फंसाया है। उन्होंने कभी बिल के लिए घूस नहीं मांगी। सहायक अध्यापक का पैसा ट्रेजरी में फंसा है।
2014 में ठप थी घूसखोरों के खिलाफ कार्रवाई
हल्द्वानी। एसपी विजिलेंस के पद पर तैनात रहे राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने 22 अप्रैल 2007 से लेकर चार अक्तूबर 2011 तक घूसखोरों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद अशोक कुमार भट्ट ने 2011 से 2013 तक अभियान चलाकर कई घूसखोरों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया। शासन ने एसपी के पद पर तैनात सुनील कुमार मीणा, विमला गुंज्याल, टीवी वैला को एसपी विजिलेंस के पद पर भेजा, लेकिन इन तीनों अधिकारियों ने किसी घूसखोर को गिरफ्तार नहीं किया। वर्तमान में पंकज भट्ट ने यहां तैनाती के दूसरे माह में ही प्रधानाचार्य को गिरफ्तार कर घूसखोरों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। एसपी पंकज भट्ट का कहना है कि जनता की हर शिकायत को गंभीरता से लेते हुए घूसखोरों को पकड़ा जाएगा। बशर्ते शिकायतकर्ता मजबूत और गंभीर होना चाहिए।