जिला पुलिस अचानक ही पेपर लीक कराने वाले गैंग के पीछे नहीं पड़ गई। इस मामले में तीन दिन पहले एसएसपी को एक गुमनाम पत्र मिला था। पत्र में गैंग के कार्य करने की शैली और यहां आने के बारे में आशंका जतायी गई थी। इसी पत्र के चलते पुलिस शिक्षा के सौदागरों की गर्दन तक पहुंच गई और अंतर्राज्यीय गैंग के मंसूबे पर पानी फेर दिया।
एसएसपी को भेजे गए पत्र में गुमनाम व्यक्ति ने बताया था कि बिहार से काफी संख्या में छात्र नीट -2 की परीक्षा देने आएंगे।
छात्रों के आने से पहले ही पेपर लीक करने वाले दलाल यहां आकर होटलों में ठहर जाएंगे। यह गैंग व्हाट्सएप के माध्यम से छात्रों को पेपर लीक कराएगा। एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने इस गैंग को पकड़ने के लिए खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों के साथ गोपनीय बैठक कर रणनीति बनाई। रणनीति के तहत शनिवार को पुलिस ने हल्द्वानी और रामनगर के होटलों और रिसोर्ट को चेक कराया।
पुलिसकर्मियों ने होटल प्रबंधकों को गैर प्रांतों से लोगों के आने पर सूचना देने को कहा। परीक्षार्थियों के आने के बाद एसएसपी ने होटलों की चेकिंग कराई। पता चला कि दो होटलों में बिहार के लोग ठहरे हुए हैं। एक होटल में रुके लोग रामनगर के रिसोर्ट में गए हैं। इसी आधार पर रामनगर सीओ ने सादे वेश में पुलिसकर्मियों को लगाया। अभिभावक बनकर परीक्षार्थियों के परिजनों से पूछताछ की। सूचना पुष्ट होने पर पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार कर पेपर लीक गैंग का पर्दाफाश किया।
पुलिस ने अभिभावकों के लिए बयान
कोतवाली पुलिस ने परीक्षा के बाद होटलों में ठहरे अभिभावकों और छात्रों को बुलाया। बारी बारी से एसएसआई विक्रम सिंह राठौर ने पूछताछ की। एक अभिभावक ने बताया कि परीक्षा के बाद 50-50 हजार रुपये दलालों को देने थे। इधर एलआईयू और स्पेशल ब्रांच के अधिकारियों ने भी सभी लोगों से पूछताछ की है।
पटना के भागवत नगर निवासी सीपी यादव की पत्नी नीबू यादव, झारखंड के धनबाद, नयाबाध की पिंकी महतो तीन दिन पहले ही अपने बच्चों को परीक्षा दिलाने के लिए नैनीताल आ गई थी। दोनों का कहना था कि यहां आने के बाद उनको दलालों के बारे में जानकारी मिली। इसी प्रकार नवादा बिहार के विनय कुमार मिश्रा ने बताया कि वह रात में ही सिंधी चौराहा स्थित होटल में आए और उन्होंने अपने नाम से दो कमरे भी बुक कराये थे।
नालंदा के ही विनय कुमार वर्मा ने बताया कि उनका पेपर लीक से कोई मतलब नहीं है। इसी प्रकार पुलिस के पास आए कुछ छात्रों ने स्वीकारा कि वे रामनगर गए थे। पुलिस ने अभिभावकों और छात्रों के मोबाइल नंबर नोट कर लिए हैं। एसएसआई का कहना है कि किसी प्रकार का साक्ष्य मिलने पर फिर अभिभावकों या छात्रों को बुलाया जा सकता है। एलआईयू और स्पेशल ब्रांच ने गिरफ्तार आरोपियों और अभिभावकों से पूछताछ कर अपनी रिपोर्ट देहरादून के उच्चाधिकारियों को भेज दी है।