हल्द्वानी। कमाल मुजफ्फर जंग की हत्या के मामले में प्रथम सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार की अदालत ने टैक्सी ड्राइवर को दोषी ठहराया है। उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
शासकीय अधिवक्ता नवीन चंद्र जोशी के अनुसार सीआरएसटी मल्लीताल निवासी दानिश जंग पुत्र कमाल मुजफ्फर जंग ने 14 अप्रैल 2013 को हल्द्वानी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। दानिश के अनुसार उसके पिता कमाल मुजफ्फर जंग (72) हृदयरोगी थे। उनकी दो बहनें सुविका जंग और अंबारका जंग पिता की सेवा करने के लिए हल्द्वानी में किराए का कमरा लेकर रह रही थी। अचानक तीनों गायब हो गए हैं। पुलिस ने जांच के दौरान 20 अप्रैल 2013 को नैनीताल में एटीएम से पैसा निकालते समय सुविका जंग को पकड़ लिया। सुविका ने पुलिस को बताया कि 13 मार्च 2013 को पिता को नैनीताल ले जाने के लिए उसने टैक्सी बुक कराई थी।
टैक्सी लाइन नंबर 17 आजाद नगर निवासी इरशाद हुसैन चला रहा था। रास्ते में घरेलू मामले को लेकर पिता और बेटी के बीच कहासुनी हो गई। इस बीच चालक टैक्सी लेकर भीमताल स्थित पैराडाइज होटल चला गया। वहां होटल के मालिक को कुछ शक हुआ तो उसने चालक को हिदायत दी कि वह यात्रियों को उनके घर छोड़ दे। चालक टैक्सी लेकर भीमताल से सात किमी दूर बोहराकून पहुंचा। वहां उसने बुजुर्ग मुजफ्फर जंग को धक्का दे दिया। उसने सुविका को हिदायत दी कि यदि वह मामले का खुलासा करेगी तो उसे फंसा देगा। इस कारण वह बरेली सहित अन्य स्थानों पर छिपती रही। चालक डराकर पैसा भी वसूला था। पुलिस ने बेटी की निशानदेही पर बोहराकून के पास खाई से कमाल मुजफ्फर जंग का शव बरामद किया। पुलिस ने इस मामले में सुविका को भी षडयंत्र का हिस्सा मानते हुए 120 बी के तहत मुल्जिम बनाया। विवेचक बीबीडी जुयाल ने चालक और कमाल मुजफ्फर जंग की बेटी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। अदालत में सुविका वादामाफी गवाह बन गई। अभियोजन पक्ष ने 17 गवाहों को कोर्ट के समक्ष पेश किया। अदालत ने चालक इरशाद हुसैन को हत्या का दोषी ठहराया।
कमाल हत्याकांड में ड्राइवर को उम्रकैद
13 मार्च 2013 को खाई में धकेलकर किया गया था बुजुर्ग का कत्ल