हल्द्वानी। बुजुर्ग माता-पिता की खुदकुशी से गमजदा दोनों बेटों घर पहुंचे तो खुद को नहीं संभाल पाए। दोनों ने कहा कि माता-पिता ने कभी भी अपने तनाव या परेशानी का जिक्र नहीं किया। यदि अपनी बात को शेयर करते तो शायद तनाव को समय रहते दूर किया जा सकता था। अब जिंदगी भर इसकी कसक रहेगी।
बागेश्वर जिले के बहुली गांव के मूल निवासी रिटायर्ड सांख्यिकी अधिकारी नंदन सिंह परिहार और उनकी शिक्षिका पत्नी कमला परिहार ने हल्द्वानी स्थित कुंवर कालोनी फेस -1 घर में खुदकुशी कर ली थी। आईबी में निरीक्षक बड़े बेटे धीरेंद्र सिंह परिहार शुक्रवार रात ही घर पहुंच गए। छोटे बेटे मेजर महेंद्र परिहार शनिवार सुबह पहुंचे। धीरेंद्र ने बताया कि दीपावली पर वह घर आए थे। तब सब कुछ सामान्य था। उन्होंने किसी भी तनाव का जिक्र नहीं किया था। दोनों बेटे भवाली में माता-पिता का अंतिम संस्कार करना चाहते थे लेकिन बुजुर्गों के कहने पर वे रानीबाग में अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार हो गए। चित्रशिला घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान बड़े बेटे की रोते रोते आंखें सूज गई थी।
बड़े भाई ने कहा, अपनी बात दिल में रखकर चला गया
हल्द्वानी। आवास विकास कालोनी में रहने वाले नंदन परिहार के बड़े भाई प्रेम परिहार ने कहा कि नंदन सब कष्ट खुद लेकर चला गया। अपनों से कभी किसी बात का जिक्र नहीं किया। चित्रशिला घाट पर प्रेम परिहार ने कहा कि नंदन अपनी पत्नी का ऑपरेशन कराने के बाद पिछले महीने ही उनसे मिलने के लिए आया था। अपने अंदर का कष्ट ही उसके लिए फोड़ा बन गया और अचानक जान देने का फैसला ले लिया।
नहीं मिला सुसाइड नोट
हल्द्वानी। मुखानी थानाध्यक्ष नंदन सिंह रावत ने नंदन सिंह परिहार के घर की कमरों की तलाशी ली लेकिन कहीं भी सुसाइड नोट नहीं मिला। थानाध्यक्ष का कहना है कि जांच में सुसाइड नोट नहीं मिला है।