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रफ्तार की पड़ रही बेकसूरों पर मार, पुलिस के हथकंडे बेकार

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हल्द्वानी। ट्रक और डंपर की तेज रफ्तार की मार शहर के प्रत्येक मार्गों पर बेकसूरों की जान जा रही है। जिला पुलिस ने नए साल में हादसों को रोकने का दावा किया था लेकिन पुलिस के हथकंडे बेकार साबित हो रहे हैं। हादसों के बढ़ने का अहम कारण पीडब्ल्यूडी और रोड निर्माण की अन्य कार्यदायी संस्थानों का असहयोग भी बताया जा रहा है।
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कुंवरपुर तिराहे पर सड़क हादसे के दौरान अध्यापक की मौत के बाद यह बात उभरकर सामने आई कि रोड इंजीनियरिंग ठीक नहीं होने के कारण इस रोड पर हादसा हुआ है। इस घटना के बाद यातायात विभाग ने पीडब्ल्यूडी से संपर्क मार्ग पर ब्रेकर बनाने का अनुरोध किया लेकिन ब्रेकर नहीं बनाया गया।

इसके पहले भी रोड की खराबी के चलते दो बहनों की खंभे से टकराने पर मौत हुई थी। 29 जनवरी की रात बरेली रोड पर तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से एमआर भगवान सिंह मेहरा की मौत हो गई। तेज रफ्तार कैंटर की टक्कर से एक फरवरी को तरुण उर्फ विक्की नेगी की मौत हो गई और उसका साथी घायल हो गया। इस घटना में भी तेज रफ्तार की बात सामने आई थी। दो फरवरी को टांडा जंगल में पीएसी जवान गगन कुमार आगरी की सड़क हादसे में हुई मौत के पीछे तेज रफ्तार का मामला सामने आया है।
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तीन फरवरी की रात रामपुर रोड पर डंपर की टक्कर से टाटा मोटर के कर्मचारी सुभेष संत आर्या की मौत के पीछे का कारण तेज रफ्तार सामने आया है। करीब हादसों में वाहनों की रफ्तार पर पुलिस लगाम नहीं लगा चुकी है। पुलिस के हथकंडे बेकार साबित हो रहे हैं। पुलिस ने ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए हैं लेकिन ऐसे स्थानों पर तेज रफ्तार की लगाम लगाने के लिए कवायद नहीं की गई है।
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