हल्द्वानी। आवासीय और व्यावसायिक भवनों के नक्शे को प्राधिकरण तभी स्वीकृति देता है जब कई विभागों द्वारा निर्माण कार्य को कराने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किया जाता है। लेकिन यहां भवन मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए एनओसी तक की जरूरत महसूस नहीं की जा रही है। प्राधिकरण ने कुछ विभागों की एनओसी के बगैर ही ग्रीन वैली के निर्माण कार्य का नक्शा पास कर दिया। भी इस निर्माण कार्य में नियम कानूनों को दरकिनार किया गया है।
भवन मानचित्र स्वीकृत कराने से पहले संबंधित व्यक्ति को नगर नियोजक, भूगर्भ वैज्ञानिक, लोनिवि, बिजली, सिंचाई, जल संस्थान और अग्नि शमन विभाग से एनओसी लेनी होती है। आवास विकास स्थित ग्रीन वैली के मामले में पुलिस और मनोरंजन कर विभाग की ओर से एनओसी जारी नहीं की गई थी जबकि विनियमित क्षेत्र के तत्कालीन नियत प्राधिकारी ने 26 अक्तूबर 2016 को पुलिस उपाधीक्षक (नगर) और जिला मनोरंजन कर अधिकारी को पत्र भेजकर एनओसी जारी करने को कहा था। यही नहीं आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के मुताबिक ग्रीन वैली का निर्माण कार्य ठंडी सड़क मार्ग के मध्य से 26.54 मीटर और आवास विकास मार्ग के मध्य से 13 मीटर की दूर होना चाहिए लेकिन यहां निर्माण कार्य की दूरी दोनों सड़कों से मानकों के मुताबिक कहीं कम है। प्राधिकरण द्वारा ग्रीन वैली में बेसमेंट खोदने की स्वीकृति 12.90 मीटर की दी हुई है लेकिन बेसमेंट इससे कहीं अधिक गहरा खोदा गया है।
यहां भी खोदी जा रही है बेसमेंट के लिए जमीन
हल्द्वानी। बेसमेंट के नाम पर शहर में प्रेम टाकिज के पास, केमू स्टेशन से रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाली सड़क के किनारे, सिंधी चौराहे के समीप, मंगल पड़ाव में सब्जी मंडी के पास, लक्ष्मी शिशु मंदिर के पास भी धड़ल्ले से खुदाई की जा रही है। प्रेम टाकिज के पास तो सड़क से सटाकर ही बेसमेंट खोदा गया है।
प्राधिकरण में स्टाफ का टोटा
हल्द्वानी। डीडीए के यहां स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के पास न तो अपना भवन है और न ही पर्याप्त स्टाफ और संसाधन। नतीजा यह है कि शहर में अवैध निर्माण करने वालों की चांदी कट रही है। प्राधिकरण का दफ्तर यहां सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय भवन के दो कमरों में चल रहा है। वहीं पूरे शहर को सुनियोजित करने का जिम्मा केवल दो अवर अभियंताओं पर है। इसके अलावा स्टाफ की भी भारी कमी है। ऐसे में प्राधिकरण के कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं और अवैध निर्माण कराने वाले चांदी काट रहे हैं।
ग्रीन वैली निर्माण की मजिस्ट्रेटी जांच शुरू कर दी गई है। रिपोर्ट 15 दिन में प्रशासन को सौंप दी जाएगी। अवर अभियंता से संबंधित निर्माण कार्य के हर पहलू की रिपोर्ट तलब की गई है। संबंधित निर्माण कार्य को कराने के लिए किन विभागों से एनओसी प्राप्त की गई है इसकी भी जांच कराई जाएगी।
-पंकज कुमार उपाध्याय संयुक्त सचिव क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण हल्द्वानी
मजिस्ट्रेटी जांच : कहीं दो साल पहले के हादसे जैसा हाल न हो जाए
हल्द्वानी। रामगढ़ ब्लाक के गागर क्षेत्र में भवाली-मुक्तेश्वर मार्ग पर 11 दिसंबर 2016 को एक होटल की नींव की खुदाई करते समय आठ मजदूर मलबे में दबकर जान गंवा बैठे थे। हादसे में झारखंड के पलामू जिले के रहने वाले सगे भाई अरुण (35) और देवेंद्र (25), अजय (25), मिथुन (20), उज्जल (25), लखीमपुर खीरी जिले के गौरीफंटा निवासी देशराज (23), राहुल (25), रमेश राणा (20) की मौत हुई थी। लखीमपुर खीरी जिले के दारिया फंटा निवासी नरेश सुरक्षित बच गया था। तत्कालीन जिलाधिकारी दीपक रावत ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए थे लेकिन जांच के दौरान मामला रफा-दफा हो गया। जांच रिपोर्ट धरी की धरी रह गई। मजदूरों के परिजनों को कोई लाभ नहीं मिल सका।
अपने पूर्व मालिक की वफादारी निभाई
हल्द्वानी। मजदूरों की मौत के मामले में मध्यस्थता करने वाले ठेकेदार धनंजय ने बताया कि उन्होंने अपने पूर्व मालिक ठेकेदार तस्लीम की वफादारी निभाई है। उन्होंने तस्लीम के अधीन काम किया था। काम सीखकर वह पीडब्ल्यूडी के नंबर वन ठेके दार बन गए। उन्होंने कहा कि कोशिश यही थी कि मजदूरों को कुछ आर्थिक लाभ मिल सके और पूर्व मालिक की वफादारी भी निभाई जाय। चूंकि मजदूर अपने परिजनों की मौत के बाद मुकदमा नहीं लड़ सकते हैं। यही कारण रहा कि मजदूरों के हित में मध्यस्थता के लिए आगे आना पड़ा है।