हल्द्वानी। मनोचिकित्सकों के अनुसार कई बार समस्या बताने को लेकर संकोच परेशानी का कारण बन जाता है। खासकर बुजुर्ग बच्चों को शारीरिक और मानसिक परेशानी से बचते हैं, ऐसे में दिक्कत और बढ़ जाती है।
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. मनोज त्रिवेदी के अनुसार डिप्रेशन को लेकर कई बार बुजुर्ग समस्याओं को बताने से बचते हैं। जहां से भी मदद की जरूरत हो, उसे मांगना चाहिए। डिप्रेशन के लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सामूहिक आत्महत्या के मामलों में देखा गया है कि एक व्यक्ति को डिप्रेशन है, तो दूसरा व्यक्ति भी कई बार प्रभाव में आ जाता है। फिर ऐसी स्थिति आती है कि दोनों सुसाइड के बारे में सोचने लगते हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल के मनोवैज्ञानिक युवराज पंत के अनुसार बुढ़ापे में बच्चों से दूर रहने वाले बुजुर्गों को परिवार के प्यार और सहयोग की दरकार होती है। यह वह स्थिति होती है जब बुजुर्ग रिग्रेशन टू चाइल्ड हुड (बचपन की तरफ लौटना) की प्रक्रिया में होते हैं। तब उनका मानसिक स्तर भी बच्चों की तरह हो जाता है। ऐसे में यदि उन्हें परिवार और बच्चों का सहयोग न मिले तो धन संपन्न होने के बाद भी वह डिप्रेशन में चले जाते हैं। बुजुर्गों में डमेंसिया (मानसिक बीमारी) भी होती है जो कि डिप्रेशन का कारण बनती है।