हल्द्वानी। राधा हत्याकांड की जांच कर रही पुलिस टीम को सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि दो संदिग्ध बैड़ा पोखरा गांव में रात 10 बजकर 20 मिनट पर गए थे।। इसके बाद रात एक बजकर 40 मिनट पर बाइक सवार निकलते हुए दिखाई दिए थे। संदिग्धों के चेहरे फुटेज में साफ नहीं दिखाई दे रहे हैं। पुलिस की सबसे बड़ी परेशानी की वजह कातिलों की धुंधला चेहरा होना बताया जा रहा है।
पुलिस की एक टीम ने गांव को मुड़ने वाले तिराहे पर स्थित मार्बल व्यवसायी की सीसीटीवी के फुटेज को तीसरी बार खंगाला। टीपीनगर चौकी प्रभारी विजय सिंह मेहता ने कहा कि अनुमान लगाया जा रहा है कि कातिल मकान की रैकी करने के लिए पहले ही गांव के खेतों में छिपे थे। मौका मिलने पर उन्होंने घटना को अंजाम दिया। पुलिस टीमें अभी तक 70 से अधिक लोगों को पकड़कर पूछताछ कर चुकी है। सीओ दिनेश चंद्र ढौडियाल का कहना है कि अभी पुलिस किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।
नीरू के कातिल तो एक महीने बाद भी नहीं पकड़े गए
हल्द्वानी। बुजुर्ग नीर नाथ साह उर्फ नीरू की हत्या के एक माह बीतने के बावजूद कातिलों का पता नहीं चल सका है। आरटीओ रोड रेशमबाग निवासी नीर नाथ साह उर्फ नीरू (74) अपनी बड़ी बहन 85 वर्षीय माहेश्वरी साह के साथ रहते थे। 15 मई की शाम नीर नाथ उर्फ नीरू साह का शव घर में दीवान बेड के अंदर पड़ा मिला था। गले में साड़ी का फंदा लगा हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि गला कसकर हत्या की गई थी, नाखूनों पर भी चोट के निशान थे। पुलिस ने बुजुर्ग के पास से काफी पैसा बरामद किया था। पुलिस ने इस मामले में परिवार के लोगों और संदेह के दायरे में आए लोगों से पूछताछ की लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। एसओजी ने भी नंबरों को लेकर काफी पड़ताल की लेकिन कोई फायदा नहीं हो सका। सीओ दिनेश चंद्र ढौडियाल का कहना है कि इस मामले में कोई सुराग नहीं मिल सका है। कुछ पुलिसकर्मियों का कहना है कि कातिलों का पता नहीं लगने पर इस मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लग सकती है।