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हजारों व्यापारियों ने टैक्स जमा करने में कर दिया खेल

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हल्द्वानी। जीएसटी लागू होने के बाद राज्य के व्यापारियों ने कर जमा करने में खेल करना शुरू कर दिया। राज्य में जीएसटीआर-1 (दुकानदारों को बेचा गया सामान) जीएसटीआर-3बी (खरीद-बिक्री का मासिक रिटर्न) में काफी अंतर आया है। इसके बाद राज्य के हजारों व्यापारियों को राज्य कर विभाग ने नोटिस भेजा है।
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राज्य में जीएसटी के तहत करीब 1.58 लाख व्यापारी पंजीकृत हैं, जबकि कुमाऊं के रुद्रपुर और हल्द्वानी संभाग में 50 हजार के करीब व्यापारियों का पंजीकरण है। पंजीकृत व्यापारी को बाह्य आपूर्ति का विवरण जीएसटीआर-1 के तहत अगले माह की 11 तारीख तक पोर्टल पर दाखिल करना होता है। 1.50 करोड़ के सालाना कारोबार करने वाले व्यापारियों को तीन माह में भी रिटर्न दाखिल करने की छूट होती है। जब बाह्य आपूर्ति करने वाला व्यापारी अपने खाते में बिक्री दिखाता है तो उसके आधार पर माल खरीदने वाले व्यापारी के खाते में टैक्स क्रेडिट जुड़ता है। उसी के आधार पर खरीदार व्यापारी को आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का लाभ मिलता है। बताया जा रहा है कि राज्य में टैक्स जमा करने में व्यापारियों ने खेल शुरू कर दिया। राज्य के 65 प्रतिशत व्यापारियों ने जीएसटीआर-1 में तिमाही टैक्स जमा किया। इनमें से हजारों व्यापारियों ने जीएसटीआर-3बी अलग विवरण दाखिल किया। करीब 25 प्रतिशत व्यापारियों ने ही बिक्री और खरीद का एक समान टैक्स दिखाया है। सूत्रों की मानें तो 2017-18 में करीब 25 प्रतिशत एवं 2018-19 में 45 प्रतिशत व्यापारियों ने जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-3बी में एक समान खरीद-बिक्री दिखाई है। बाकी व्यापारियों की खरीद बिक्री की डिटेल में अंतर आया है। इसी कारण विभाग ने हजारों व्यापारियों को नोटिस जारी कर दिया है।

हजारों व्यापारियों ने टैक्स जमा करने में कर दिया खेल
बिक्री और मासिक रिटर्न दाखिल करने में है भारी अंतर, राज्य कर विभाग ने भेजा नोटिस

खातों की जांच में खुली गड़बड़ी
राज्य कर विभाग ने जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-3बी में एक समान टैक्स डिटेल न मिलने पर जांच शुरू की। हजारों खाते में समान टैक्स नहीं दिखने पर विभाग ने विभाग ने व्यापारियों को नोटिस भी भेजा है। इन्हें टैक्स जमा करने को कहा गया है।
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जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-3 बी के खातों के मिलान में टैक्स जमा नहीं करने की बात सामने आई है। इस पर व्यापारियों को नोटिस भेजकर टैक्स जमा करने को कहा जा रहा है। -पीएस डुंगरियाल, संयुक्त आयुक्त, राज्यकर
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