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नशा मुक्ति केंद्र के सचिव पर मुकदमा दर्ज

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हल्द्वानी। नशा मुक्ति केंद्र में मरीज पर हमले के आरोप में मुखानी पुलिस ने संस्था के सचिव सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मरीज की हालत नाजुक बताई जा रही है। उसका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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दमुवाढूंगा मल्ला प्लाट निवासी व्यवसायी रमेश वर्मा (48) को शराब छुड़ाने के लिए परिजनों ने 18 फरवरी को कालाढूंगी रोड स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया था। संस्था में उसकी हालत बिगड़ने पर एसटीएच में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने अन्यत्र ले जाने की सलाह दी थी। संस्था के लोगों ने उसे नैनीताल रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। रमेश के बेटे दीपक कुमार ने बताया कि सिटी स्कैन कराने पर पता चला है कि उसके पिता के सिर में खून जम गया है। मस्तिष्क काम नहीं कर रहा है। दीपक कुमार ने मुखानी थाने में तहरीर देकर बताया कि उसके पिता को संस्था में पीटा गया था। इसी कारण उन्हें तीन दिन से होश नहीं आया है। थानाध्यक्ष कमाल हसन ने बताया कि संस्था के सचिव दीपक सनवाल के खिलाफ धारा 308 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस इस मामले में डीबीआर के आधार पर जानकारी इकट्ठा कर रही है। अभी डाक्टर से बयान नहीं लिया गया है। पुलिस ने कर्मचारियों से पूछताछ की है।

आठ महीने पहले एक मरीज की मौत से मचा था हड़कंप
हल्द्वानी। हीरानगर स्थित निर्वाण नशा मुक्ति केंद्र में 23 जून 2017 की रात बवाल हुआ था। संस्था में भर्ती 13 मरीज भाग गए थे। बरेली निवासी मरीज तारीक इब्राहिम लगन गार्डन के पास झाड़ी में बेहोश मिला था। जिसकी बाद में मौत हो गई थी। इस मामले में पुुलिस ने संस्था के एक कर्मचारी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। तारीक के जीजा मोहसिन रजा इस मामले की पैरवी कर रहे हैं।
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प्रशासन ने तो आंख और कान बंद कर रखे हैं
हल्द्वानी। नशा मुक्ति केंद्रों के हाल को देखने के लिए प्रशासन के अधिकारी सिर्फ दावे ही करते रहे। मौका मुआयना करने की जरूरत नहीं समझी गई। जबकि इन केंद्रों की स्थिति पर समय-समय पर आरोप लगते रहे हैं।
करीब पांच महीने पहले अमर उजाला ने जब नशा मुक्ति केंद्र नहीं, ये तो नरक है शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी तो एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव और सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय ने केंद्रों की जांच करने और मेडिकल टीम को भेजने की बात कही थी। लेकिन कुछ नहीं हुआ। तब एक युवक ने आरोप लगाया था कि दवाई के नाम पर केंद्र में जेब काटी जाती है। मोटी फीस ऐंठने के बाद भी न तो भरपेट ढंग का खाना मिलता था न नहाने के लिए पानी व साबुन। बिस्तर और कमरे के हाल पर सवाल उठाए थे। युवक ने केंद्र के कर्मचारी पर नशे में रहने और मारपीट करने का भी आरोप लगाया था।
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