हल्द्वानी। गोरापड़ाव के हत्याकांड के बाद पुलिस ने युवक और युवतियों से पूछताछ करना शुरू किया तो एक माह पहले पता लग गया कि शहर में हुक्का बार के चलते युवा पीढ़ी नशे की शिकार हो रही है। सबसे अधिक संख्या में किस बार में बच्चे बैठते हैं, इसकी जानकारी मिल गई थी। बावजूद इसके पुलिस और प्रशासन ने आंखें मूंद रखी थीं। छापा मारने पर वही बार पकड़ में नहीं आया जिसका खुलासा युवक और युवतियों ने किया था।
हत्याकांड के बारे में पूछताछ को सितंबर के प्रथम सप्ताह में बुलाए गए बच्चों ने बताया कि वे दुर्गा सिटी सेंटर और एक अन्य बदनाम बार में बच्चों के गेम और अन्य गतिविधियों के अलावा हुक्का बार की व्यवस्था है। इसी बार में इंटर से लेकर डिग्री कॉलेज के युवक और युवतियां बैठते हैं। धीरे-धीरे हुक्के का आनंद लेते हुए वे नशे की गिरफ्त में आ गए। पुलिस ने नशे की गिरफ्त में आए करीब 50 युवक और युवतियों को चिन्हित किया था। चूंकि इस प्रकार के अड्डों को बंद करने के लिए प्रशासनिक सहयोग की जरूरत पड़ती है। इसी कारण पुलिस ने छापा मारने की बात कहने के बाद चुप्पी साध ली। बृहस्पतिवार को जब पुलिस और प्रशासन ने छापा मारा तो इसकी भनक बदनाम बार तक पहुंच गई और पुलिस हाथ मलती रह गई। छापा मारने पर प्रशासन ने खुलासा किया कि यहां हुक्का बार के लिए लाइसेंस नहीं मिलता है। लोगों का कहना है कि यदि एक बार के आगे एक पुलिसकर्मी खड़ा कर दिया जाए तो बच्चे नशे की गिरफ्त में नहीं जाएंगे। यदि जाते हैं तो चिन्हित हो जाएंगे। छूट मिलने ही वजह से पैसे के लालच में बच्चों को बर्बाद करने का अड्डा हुक्का बार बन गए हैं।
दिल्ली की हवा हल्द्वानी को लग गई
अधिकारियों ने चर्चा के दौरान बताया कि दिल्ली में पहले हुक्का बार चलते थे लेकिन वहां की सरकार ने कुछ घटनाएं होने पर सभी बारों को बंद करा दिया। दिल्ली से चली हवा हल्द्वानी को लग गई। यहां एक-एक कर रेस्टोरेंट का लाइसेंस लेकर हुक्का बार खोले जाने लगे।