नैनीताल। मल्लीताल स्थित मेट्रोपोल होटल में सोमवार शाम आग लग गई। भीषण अग्निकांड में होटल का एक भवन राख हो गया। दमकम कर्मियों को आग बुझाने में तीन घंटे लग गए। आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। छह साल पहले भी होटल के मुख्य भवन में आग लग गई थी। जिस भवन में आग लगी है वहां पूर्व में वाणिज्य कर विभाग का दफ्तर संचालित होता था।
सोमवार शाम करीब 6:30 बजे शत्रु संपत्ति मेट्रोपोल होटल का एक भवन आग की चपेट में आ गया। आग की लपटें देख पहुंचे लोगों ने दमकल विभाग को सूचना दी तो तीन गाड़ियां पहुंच गईं। इस बीच आग विकराल रूप धारण कर चुकी थी। फायर हाईड्रेंट न होने की वजह से दमकल विभाग को आग बुझाने में काफी परेशानी झेलनी पड़ी। भारी बारिश और ओलावृष्टि के बावजूद आग धधकती रही। आग को देखते हुए इलाके की बिजली सप्लाई को बंद कर दिया गया। एसडीएम विनोद कुमार, सीओ विजय थापा, तहसीलदार किशन राम, पटवारी अमित साह, अग्निशमन अधिकारी कैलाश चंद्र, कोतवाली के वरिष्ठ उप निरीक्षक भुवन चंद्र मासीवाल, एसआई दीपक बिष्ट, कुलदीप, गोपाल राम, देवेंद्र, गौरव कार्की, दिनेश राणा, विजय राणा, दिनेश आर्या आग बुझाने में जुटे हुए थे। बता दें कि 27 नवम्बर 2013 को भी इस होटल का मुख्य भवन आग की चपेट में आ गया था।
मेट्रोपोल होटल में धधकी आग
तीन घंटे तक आग की लपटों से होटल का एक भवन राख, छह साल बाद फिर हुआ हादसा
आखिर जिम्मेदार कौन
नैनीताल। मेट्रोपोल होटल के एक हिस्से में लगी आग के पीछे स्थानीय लोग नशेड़ियों का हाथ बता रहे हैं। उनका कहना है कि यहां हर वक्त नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है। पुलिस की ओर नजर नहीं पड़ती। उनका कहना है कि यदि प्रशासन अभी भी नहीं जागा तो किसी की जान भी जा सकती है। मामले को लेकर सीओ विजय थापा का कहना कि अभी कारणों का पता नहीं चल सका है, लेकिन आग बुझने के बाद कारणों की जांच की जाएगी।
यहीं खड़े होते हैं वकीलों के वाहन
नैनीताल। मेट्रोपोल क्षेत्र में ही जिस भवन में आग लगी ठीक उसके नीचे हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं के पार्किंग की व्यवस्था है, जिस समय आग लगी उस वक्त कुछ वाहन पार्किंग स्थल पर ही खड़े थे।
ओलावृष्टि के कारण सड़क पर लगा जाम
नैनीताल। नैनीताल में हुई भारी ओलावृष्टि के कारण मस्जिद तिराहे से लेकर मनु महारानी होटल को जाने वाले मार्ग पर लंबा जाम भी लग गया था, जिस कारण दमकल विभाग के वाहनों जाम में फंस गए। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए जेसीबी ने सड़क से ओलों को हटाया इसके बाद यातायात सुचारु हो सका।