हल्द्वानी। कमला परिहार के भाई तल्ली निवासी गोविंद सिंह और उनकी पत्नी पुष्पा ने कहा था कि बुढ़ापे में खाना बनाना अच्छा नहीं लगता था। उन्होंने अपने घर लेकर जाने के लिए दबाव बनाया लेकिन दंपति ने अस्वीकार कर दिया।
रिश्तेदार डॉ. बीएस रैक्वाल और प्रतीक बिष्ट ने बताया कि बीमारी की वजह से परिहार दंपति परेशान रहते थे। झाड़ू-पोंछे के लिए नौकरानी आती थी लेकिन सुबह शाम का खाना बुजुर्ग दंपति आपसी सहयोग से ही बनाते थे। बुजुर्ग महिला रोटी बेलती थी तो पति उसे सेकते थे। कई बार पड़ोसी भी उनको खाना पकाकर देते थे। इसकी चर्चा नंदन परिहार अपने अन्य पड़ोसियों से भी करते थे।
दीपावली पर आया था बड़ा बेटा
हल्द्वानी। मृतक नंदन परिहार के साले ने बताया कि दीपावली पर बड़ा बेटा धीरेंद्र घर आया था। रक्षाबंधन पर साले गोविंद सिंह अपनी बहन कमला से राखी बंधवाने के लिए आए थे। उस समय बहन ठीक थी। जीजा कभी तनावग्रस्त होकर झुंझलाहट में कड़ा बोल देते थे लेकिन उनकी बात का कोई बुरा नहीं मानता था।
दोनों साथ-साथ मरने की करते थे चर्चा
हल्द्वानी। पड़ोसी बीसी पंत और महेश सिंह बिष्ट ने बताया कि बुजुर्ग परिहार दंपति एक दूसरे का बहुत ख्याल रखते थे। दोनों के बीच काफी प्रेम था। कई बार एक दूसरे की बीमारी के चलते झुंझलाहट में कई बार एक साथ मरने की चर्चा करते थे। शायद इसीलिए दोनों ने एक साथ जान भी दे दी। बृहस्पतिवार शाम को ही नंदन परिहार पड़ोस में एक अस्वस्थ व्यक्ति का हाल-चाल जानने पहुंचे थे।
सात दिसंबर को बुजुर्ग शिक्षिका को कराना था चेकअप
हल्द्वानी। छोटे बेटे महेंद्र सिंह बिष्ट के दोस्त डॉ. अमित मेहरा ने बताया कि बुढ़ापे में इलाज की सुविधा के लिए नंदन सिंह रावत और कमला रावत ने पांच साल पहले भवाली दुगई स्टेट में बने घर को छोड़कर हल्द्वानी में रहने का फैसला किया था। सात दिसंबर को कमला परिहार को चेकअप के लिए दिल्ली स्थित मेदांता अस्पताल में जाना था लेकिन इससे पहले ही यह अनहोनी घटना हो गई।
अंकल जी ने पहली बार झाड़ू पोंछे के लिए किया था मना
हल्द्वानी। आग लगाकर जान देने वाले बुजुर्ग नंदन सिंह परिहार के घर कुंवर कालोनी फेस -1 निवासी लक्ष्मी रोज झाड़ू पोंछा और बर्तन मांजती थी। नौकरानी लक्ष्मी ने बताया कि वह शुक्रवार सुबह साढ़े छह बजे घर पर पहुंची। चार बार घर की डोर वेल बजाने के बाद अंकलजी (नंदन परिहार) ने गेट खोला था। अंदर आने पर उन्होंने दो हजार रुपये दिए। नौकरानी ने सवाल किया कि अंकलजी अभी तो महीना 30 नवंबर को पूरा होगा। पहले क्यों पैसा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी उनको विदेश जाना है। लौटकर आऊंगा तो फोन कर बुला लूंगा। अंकलजी कभी झाड़ू पोंछा लगाने के लिए मना नहीं करते थे लेकिन पहली बार मना किया था। अंदर जाने से रोकने पर नौकरानी को कुछ असहज लगा। चूंकि सिर्फ चार बर्तन मांजना था। इसी कारण वह बर्तन मांजकर चली गई। जाते समय अंकलजी गेट बंद कर अंदर चले गए। नौकरानी ने पूछताछ के दौरान सीओ दिनेश चंद्र ढौडियाल को बताया कि पति-पत्नी दोनों का व्यवहार काफी अच्छा था। दोनों उसे पांच बजे सुबह आने के लिए कहते थे लेकिन अपने बच्चों के पालने का हवाला देते हुए ज्यादा सुबह आने से उसने इनकार कर दिया था।
भवाली में होगा अंतिम संस्कार
हल्द्वानी। रिटायर्ड शिक्षक के करीबियों ने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर आईबी में कार्यरत बड़ा बेटा धीरेंद्र हरिद्वार से रवाना हो गया था लेकिन जाम में गाड़ी फंस गई। इसी कारण वह समय से आ नहीं सका। परिजनों ने शवों को फ्रीजर में रखवा दिया है। अगले दिन भवाली में दोनों शवों का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
19 अक्तूबर को भवाली आए थे रिटायर्ड अधिकारी नंदन
भवाली। आग लगाकर जान देने वाले नंदन सिंह परिहार अपनी पत्नी कमला परिहार के साथ भवाली में 25 से 30 सालों से रह रहे थे। नंदन सिंह परिहार सांख्यिकी विभाग नैनीताल में कार्यरत थे। यहां से वह 2009 में सेवानिवृत्त हुए।
बागेश्वर के मूल निवासी नंदन परिहार की पत्नी कमला परिहार भवाली जीजीआईसी में अंग्रेजी की अध्यापिका थीं। शिक्षिका भी 2009 में सेवानिवृत्त हुईं थीं। दोनों ने 1993 में भवाली स्थित दुगई स्टेट में अपना मकान बनाया था। वर्तमान समय में उनके मकान में सिर्फ किरायेदार रहते हैं। कमला परिहार हृदयरोग की बीमारी से पीड़ित थीं। कुछ माह पहले ही उनकी मेदांता अस्पताल गुड़गांव में बाईपास सर्जरी कराई थी। किरायेदारों ने बताया कि पिछले माह 19 अक्टूबर को नंदन सिंह परिहार अपने भवाली स्थित मकान में आए थे।