हल्द्वानी। मैदानी इलाकों में सबसे अधिक हिंसा अवैध खनन को लेकर होती है लेकिन कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों ने इस गंभीर अपराध से जुड़े लोगों को सूचीबद्ध नहीं किया है। यही कारण है कि पुलिस सामान्य अपराध जैसे मुकदमा दर्ज कर केस डायरी अदालत भेजकर ड्यूटी पूरी कर देती है। हमले बढ़ने और प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से वन विभाग के अधिकारी चिंतित हो गए हैं।
सत्ता से जुड़े नेता खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए जुबानी जंग करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं होता। पुलिस अपराध रोकने के लिए गुंडा गैंगस्टर, हिस्ट्रीशीटर सहित अन्य प्रकार की निरोधात्मक कार्रवाई करती है लेकिन खनन माफिया, परिवहन माफिया की कोई सूची उपलब्ध नहीं है। उनका डोजियर तैयार नहीं किया जाता है। इसी कारण निरोधात्मक कार्रवाई भी नहीं हो सकती है। पिछले साल 26 मार्च को रामनगर में खनन माफिया ने एक वनकर्मी को कुचलकर मार डाला था। 27 मार्च को बरहैनी रेंज में फायरिंग की घटना हुई थी। 15 मार्च 2017 को कोसी में वनकर्मियों पर फायरिंग की गई। बनभूलपुरा, काठगोदाम और लालकुआं क्षेत्र में वनकर्मियों पर हमले किए गए। पुलिस और आम जनता को पता है कि अवैध खनन से जुड़े लोग आसमान से टपके नहीं है। सभी क्षेत्र में रहकर अपने बलबूते अवैध खनन कराते हैं। इस खेल में सफेदपोश, पुलिस और वनकर्मी भी शामिल रहते हैं। एक खनन माफिया के पास 22-22 डंपर हैं। इन वाहनों को रिकॉर्ड परिवहन विभाग के पास नहीं है। ये लोग गिरोह बनाकर अपराध करते हैं। फिर भी खनन माफिया में नाम प्रकाश में नहीं आता है। इस बारे में एसएसपी जन्मेजय खंडूरी का कहना है कि यदि गिरोह बनाकर अपराध करते हैं तो अपराध की तरह कार्रवाई की जाएगी।
डोजियर भी नहीं बनते, सफेदपोश और खाकी अवैध खनन के बनते हैं मददगार
लगातार हमलों से वनविभाग के अधिकारी भी चिंतित
आईजी ने दिए खनन माफिया को सूचीबद्ध करने के निर्देश
आईजी रेंज पूरन सिंह रावत ने बताया कि खनन माफिया के खिलाफ जमीनी स्तर पर कार्रवाई करने के लिए गठित एसआईटी पहले भंग कर दी गई। अब जिला पुलिस को नए निर्देश दिए गए हैं। जिला पुलिस नए आदेश के तहत अवैध खनन में लिप्त लोगों को सूचीबद्ध करने के बाद कार्रवाई करेगी।