नैनीताल। कमल किशोर, चनी राम और खड़ग सिंह के अलावा छह अन्य के भी फर्जी कर्नल की ठगी का शिकार होने की आशंका है। उसके कमरे से तलाशी के दौरान पुलिस को डाक विभाग की सात रसीदें मिलीं हैं। इन रसीदों से कर्नल ने छह लोगों को दस्तावेज भेजे हैं। रसीदों पर मुकदमा दर्ज करवाने वाले कमल किशोर के अलावा छह अन्य के नाम हैं। आशंका जताई जा रही है कि फर्जी कर्नल ने ऐसे छह अन्य को चूना लगाया है, जो सामने नहीं आए हैं। सोमवार को दिनभर पुलिस कर्नल के कमरे से मिला सामान खंगालती रही।
जिला औरैया उत्तर प्रदेश निवासी मनोज कुमार सिंह उर्फ सूर्यप्रताप सिंह खुद को सेना में कर्नल बताकर लोगों को ठगता था। उसने मल्लीताल के एक होटल में डेढ़ माह तक कमरा किराये पर लिया था। इस दौरान वह तीन से अधिक लोगों को लाखों का चूना लगाकर 18 मई को भाग गया। होटल मैनेजर कमल किशोर, नाविक चनीराम और चाय विक्रेता खड़ग सिंह ने मल्लीताल कोतवाली पुलिस से शिकायत की। यहां रिपोर्ट दर्ज होने पर वह 19 मई को कानपुर में पकड़ा गया। पुलिस ने रविवार को मनोज का सामान होटल से निकाल कर कब्जे में ले लिया। इसमें डाक विभाग की सात रसीदें भी मिली हैं। इन रसीदों से गैरीखेत नैनीताल निवासी गंगा, अल्मोड़ा के पनुवानौला निवासी कमल किशोर, अल्मोड़ा के ही लमगड़ा निवासी रविंद्र सिंह, पिथौरागढ़ के मल्ला गर्खा गंगोलीहाट निवासी अर्जुन कुमार, नैनीताल के स्नोव्यू वार्ड निवासी मनोज कुमार, ऐरीखान अल्मोड़ा निवासी विनोद कुमार को डाक के माध्यम से पत्र भेजे गए हैं। इनमें एक पत्र तीन लाख की ठगी के शिकार होटल मैनेजर कमल किशोर को भेजा गया है जबकि अन्य छह पत्र ऐसे लोगों को भेजे गए हैं, जो सामने नहीं आए हैं। अब पुलिस को आशंका है कि शायद छह अन्य लोगों को भी डाक के माध्यम से फर्जी कॉल लेटर भेजे गए होंगे और इनसे भी मोटी रकम वसूली गई होगी। पुलिस रसीदों पर दर्ज नाम और पतों की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।
फर्जी कर्नल के छह अन्य को शिकार बनाने की आशंका
पुलिस को कमरे से मिलीं डाक विभाग की सात रसीदें
कमल किशोर के अलावा छह अन्य को डाक से भेजे हैं दस्तावेज
इन रसीदों से फर्जी कॉल लेटर भेजने की आशंका
दस्तावेजों की कमी के कारण नहीं हो सका बी वारंट का आवेदन
नैनीताल। मल्लीताल कोतवाली पुलिस फर्जी कर्नल मनोज कुमार से पूछताछ के लिए रिमांड पर लेना चाहती है। इसके लिए सोमवार को सीजेएम कोर्ट में आवेदन कर आरोपी मनोज का बी वारंट लिया जाना था, लेकिन दस्तावेजों की कमी के चलते ऐसा नहीं किया जा सका। सूत्रों के अनुसार बी वारंट के लिए कोर्ट में यह साबित करना होता कि पुलिस जिस व्यक्ति का बी वारंट लेना चाहती है, वही आरोपी अमुक जेल में बंद है। पुलिस को इसके लिए दस्तावेजी प्रमाण भी चाहिए। सोमवार को दस्तावेजी प्रमाण न होने के कारण पुलिस सीजेएम कोर्ट में आवेदन नहीं कर सकी। अब पुलिस पहले कानपुर जाकर मनोज कुमार की गिरफ्तारी के दस्तावेजी प्रमाण जुटाएगी। तभी बी वारंट के लिए आवेदन किया जाएगा।