नैनीताल। धोखेबाजों ने गैंगेस्टर के आरोपी को जेल से छुड़ाने के लिए अदालत से धोखाधड़ी की कोशिश कर दी। जालसाजों ने जमानत के दस्तावेजों को काशीपुर के तहसीलदार और कोतवाल के फर्जी हस्ताक्षर और मोहर से खुद ही प्रमाणित कर दिया। शक होने पर कोर्ट ने जांच कराई तो षड्यंत्र का पर्दाफाश हो गया। इस मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ तल्लीताल थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस केस की विवेचना कर रही है।
तल्लीताल पुलिस के अनुसार गैंगेस्टर कोर्ट के अहलमद उबेश सिद्दीकी ने तहरीर देकर बताया कि ऊधमसिंह नगर जिले के काशीपुर का नन्हें गैंगेस्टर है। वह जेल में बंद है। 15 सितंबर को काशीपुर निवासी नाजिम, सिकंदर और अफसर अली ने गैंगेस्टर की जमानत के लिए दस्तावेज दाखिल किए। शक होने पर कोर्ट ने तहसीलदार काशीपुर और कोतवाल से दोबारा जांच कराई। इसमें पता चला कि दोनों जगह से दस्तावेजों का सत्यापन हुआ ही नहीं है।
तहसील और कोतवाल दोनों के फर्जी हस्ताक्षर और मोहर का प्रयोग किया गया है। न तो तहसील से सत्यापन असली है और न ही कोतवाली से। जालसाजों ने गैंगेस्टर को छुड़ाने के लिए आपराधिक षड्यंत्र रचा है। शुक्रवार देर रात अहलमद उबेश सिद्दीकी की तहरीर पर पुलिस ने धारा 420, 467, 468, 471 में रिपोर्ट दर्ज कर ली। एसओ राहुल राठी बताया कि पुलिस आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
काशीपुर के तहसीलदार और कोतवाल के फर्जी हस्ताक्षरों से प्रमाणित करा लिए जमानत के दस्तावेज
शक होने पर अदालत ने जांच कराई तो खुला फर्जीवाड़ा, तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज