ज्योलीकोट (नैनीताल)। दो दिन पहले ज्योलीकोट से नैनीताल स्थित चिड़ियाघर पहुंचाई गई लेपर्ड कैट की इलाज के दौरान मौत हो गई। उक्त लैपर्ड कैट फंगल इंफेक्शन से पीड़ित थी। वहीं दूसरी ओर वन विभाग ने शनिवार को भी ज्योलीकोट क्षेत्र से एक लैपर्ड कैट को पकड़कर चिड़ियाघर में पहुंचाया है। शनिवार को पकड़ी गई लैपर्ड कैट स्वस्थ और वयस्क है।
संरक्षित वन्य जीवों में शामिल लैपर्ड कैट का वजूद खतरे में है, लेकिन नैनीताल वन प्रभाग के मनोरा वन रेंज में लैपर्ड कैट की संख्या खासी है। इस कारण यहां इनकी मौजूदगी मिलती है। तेंदुए से मिलते रंग रूप और चाल-ढाल के कारण इसे लैपर्ड कैट कहा जाता है।
वन विभाग के उप रेंज अधिकारी आनंद लाल ने बताया कि शनिवार को स्यालीखेत क्षेत्र से लैपर्ड कैट को पकड़कर चिड़ियाघर में पहुंचाया है। बृहस्पतिवार को भी एक लैपर्ड कैट को चिड़ियाघर में पहुंचाया था जहां उसकी मौत हो गई थी। चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. योगेश भारद्वाज के मुताबिक मरने वाली लैपर्ड कैट फंगल इफेक्शन से पीड़ित थी। डॉ. भारद्वाज ने बताया कि शनिवार को जू में पहुंचाई गई लैपर्ड कैट में भी फंगल इंफेक्शन है, लेकिन इसकी हालत गंभीर नहीं है।