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कालाढूंगी कांड में अब तक छूट चुके हैं 60 से ज्यादा आरोपी

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कोर्ट - फोटो : amar ujala
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नैनीताल। कारण पुलिस की लचर पैरवी रही हो या सरकार की मुकदमे वापसी बर्बरता के लिए कुख्यात कालाढूंगी कांड 60 से ज्यादा आरोपी छूट चुके हैं। न हत्या में सजा मिली और न ही कानून से खिलवाड़ करने वाले बलवाई ही फंसे। यहां तक की गैंगेस्टर के आरोपी भी जिला एवं सत्र न्यायालय से सबूतों के अभाव में बरी हो गए। बलवंत सिंह कन्याल की हत्या के अगले दिन 23 अगस्त 2009 को भीड़ ने थाना फूंक दिया। एक पुलिस कर्मी को मौत के घाट उतार दिया गया। कई वाहन भी फूंक डाले। शुरुआत में पुलिस ने मुकदमे को बहुत मजबूती से खड़ा किया। यहां तक की तत्कालीन एसओ तक को नहीं बख्शा गया, उस पर भी हत्या के सबूत मिटाने का केस दर्ज किया गया। बलवा, हत्या करने में 56 ज्ञात समेत भारी संख्या में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ। हत्या एक पुलिस कर्मी की होने के कारण पुलिस ने पूरी मुस्तैदी से सबूत जुटाए, लेकिन केस इतना मजबूत नहीं बन सको जो किसी को सजा दिला पाता। नतीजा एक के बाद एक सभी आरोपी छूटते गए। बलवंत हत्याकांड से जुड़े सभी केसों में 60 से ज्यादा आरोपी बरी हो चुके हैं। सरकार ने मुकदमा वापस ले लिया। हाल ही में विशेष गैंगेस्टर कोर्ट ने सभी आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। केस हाइकोर्ट में गतिमान होने के कारण बलवा, हत्या, आगजनी के आरोपियों पर तलवार लटक रही थी, लेकिन अब हाइकोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए इन आरोपियों को भी बरी कर दिया है। इस तरह कालाढूंगी कांड से जुड़े अधिकतर आरोपी बरी हो चुके हैं।
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कब क्या हुआ
22 अगस्त 2009 को बलवंत कन्याल की हत्या।
23 अगस्त 2009 को भीड़ से थाना फूंका, पुलिस कर्मी की मौत।
05 सितंबर 2009 को 14 लोगों पर गैंगेस्टर एक्ट में कार्रवाई।
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