हल्द्वानी। जिले में साइबर क्राइम तेजी से बढ़ता जा रहा है। पेंशनभोगी और उनके परिवार इसके अधिक शिकार हो रहे हैं। साइबर अपराधियों का बड़ा ठिकाना झारखंड का नक्सली क्षेत्र है लेकिन पुलिस वहां पहुंच नहीं पाती है।
साइबर अपराधी पहले खुद को बैंक अधिकारी बताकर कॉल करते हैं। दावा करते हैं कि आपका एटीएम कार्ड बंद होने वाला हैं। एटीएम यदि चालू रखना है तो उसके पीछे लिखे नंबर को बता दें। झांसे में आकर आम लोग उसे नंबर बता देते हैं। इसके बाद साइबर अपराधी संबंधित व्यक्ति के खाते से आनलाइन खरीदारी कर लेता हैं। पैसा निकलने का मैसेज आने पर आम लोगों को पता करता है। थाने के दरोगा शिकायतों को लेने के बाद उसे जांच के लिए रख लेते हैं। कुछ दिनों तक भागदौड़ करने के बाद शिकायतकर्ता घर बैठ जाते हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि झारखंड स्थित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जालसाजों को पकड़ना कठिन है। इस गिरोह को पकड़ने में अन्य प्रांतों की टीम विफल रहती है। पुलिस जब गिरोह को पकड़ने जाती है तो उनको पुलिस के आने की भनक पहले ही मिल जाती है। पुलिस रिकार्ड के अनुसार पिछले साल जालसाजी के 58 मामले दर्ज हुए थे लेकिन 2018 में अभी तक 110 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
सावधान हो जाइए, झारखंड का गिरोह कर रहा है साइबर क्राइम
पेंशनभोगी अधिक हो रहे हैं शिकार, अपने खाते की जानकारी किसी को न दें
मोबाइल कंपनियों के नाम पर जॉलसाजों का कॉल
हल्द्वानी। अब मोबाइल कंपनियों के नाम पर काल कर जालसाज डाटा चुरा रहे हैं। यह गिरोह डॉटा लेकर बैंक खातों की जानकारी हासिल कर लेता है। प्रदेश की पुलिस को इस प्रकार के अपराध से बचने के लिए पुक (पीयूके) लगाने की सलाह दी है। देहरादून में आए एक्सपर्ट ने एसओजी टीम को बताया कि दिल्ली सहित अन्य प्रांतों में जालसाजों का गिरोह संबंधित कंपनी कंपनी का अधिकारी बनकर कॉल करता है, जिस कंपनी का सिम आम लोग प्रयोग कर रहे हैं। मोबाइल यूजर को कॉल आता है कि आप के नाम पर कोई कॉल किया था कि मोबाइल सिम बंद करना है। यदि नहीं चाहते हैं तो आप मेरे द्वारा भेजे गए मैसेज को 121 पर भेजे। इसी प्रकार मैसेज लेकर जालसाज मोबाइल बंद कर लेते हैं। डॉटा की क्लोनिंग कर बैंक खाता और अन्य जानकारियां हासिल कर लेते हैं। मोबाइल यूजर को भनक भी नहीं लगती है। पैसा निकलने पर पता चलता है कि जालसाज के बताने पर अपनी जानकारी दी थी।
कैसे बचें
एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव ने भी आम लोगों को ऐसे जॉलसाजों से सतर्क रहने की सलाह दी है। ये लाटरी लगने के नाम पर भी ठगी करते हैं। एसओजी प्रभारी दिनेश चंद्र पंत का कहना है कि इस प्रकार के अपराध दिल्ली में हुए हैं। आम लोगों को अपने नंबर में पुक (पीयूके) लगाना चाहिए। इस प्रकार पुक लगाने पर जालसाज मोबाइल उपभोक्ता का कुछ बिगाड़ नहीं सकते हैं।