हल्द्वानी। निर्माणाधीन मॉल के मिक्सचर प्लांट के पास 1200 बोरी सीमेंट से लदे कंटेनर से दबकर तीन मजदूरों की मौत से भड़के परिजनों ने मुआवजे की मांग करते हुए शवों को मोर्चरी से उठाने से इनकार कर दिया। इसके बाद कुछ लोगों ने मध्यस्थता कराकर मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये दिलाकर मामला निपटा दिया। मजदूरों के परिजन समझौता कर शव लेकर अपने गांव चले गए। इस मामले में गिरफ्तार मुंशी चंदन सिंह मेहरा को मंगलवार को अदालत के समक्ष पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
आवास विकास कालोनी के सामने ठंडी सड़क स्थित निर्माणाधीन मॉल परिसर में रखे कंटेनर के नीचे दबकर सोमवार दोपहर यूपी के लखीमपुर जिले के रामसागर, मूलचंद और सोनू की मौत हो गई थी। घंटों बाद पुलिस ने मजदूरों के शवों को बाहर निकाला। मंगलवार को मजदूरों के परिजन पुलिस के पास पहुंचे। उन्होंने कहा कि जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा तब तक शव का पोस्टमार्टम नहीं कराने जाएंगे। मृतक रामसागर के पिता मुखलाल, मूलचंद के भाई मुन्नीलाल और सोनू के भाई राम स्वरूप को मनाने के लिए मॉल मालिकों की ओर से पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार धनंजय ने मोर्चा संभाला। उन्होंने मजदूरों के परिजनों की काफी मान मनौव्वल की। मंगलवार की दोपहर तय हुआ कि मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये दिया जाएगा। साथी मजदूरों को दस हजार रुपये के साथ ही दो दिनों की मजदूरी और घर तक एंबुलेंस जे जाने का खर्च देने पर भी सहमति बनी। दोपहर करीब दो बजे परिजनों को नगद रुपये दिए गए तब पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू हुई।
नगद मुआवजा मिलने के बाद उठाए परिजनों ने शव, पहले किया था शव उठाने से इनकार
कंटेनर से दबकर तीन मजदूरों की मौत का मामला
प्रधान के खाते में नहीं डाला गया पैसा
लखीमपुर खीरी जिले के ईसानगर बीरसनपुर के ग्राम प्रधान ने ठेकेदार से कहा कि मजदूरों के मुआवजे का पैसा उसके खाते में डाल दें लेकिन ठेकेदार ने अपने दोस्तों से पूछने के बाद पैसा गांव प्रधान के खाते में डालने से मना कर दिया। अंत में नगद पैसा देने पर सहमति बन सकी।
रोते-रोते लेट गया मुखलाल
मोर्चरी के सामने मृतक राम सागर का पिता मुखलाल रोते-रोते लेट गया। मुखलाल का कहना था कि रामसागर की दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी संगीता चार साल और छोटी कामिनी डेढ़ साल की है। अब कैसे उसकी बेटियों को पाला जाएगा। उसके दो अन्य बेटे भी मजदूरी कर अपना पेट पालते हैं।