हल्द्वानी। संपत्ति हथियाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं कर देते। बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने वाली एक शिक्षिका का जब देहांत हुआ तब अंतिम क्रियाकर्म करने वाला कोई नहीं था। पुलिस ने लावारिस में उनका अंतिम संस्कार कर दिया मगर दो लोगों ने उनकी संपत्ति हथियाने के लिए फर्जी वसीयत बना दी और खुद को उनका वारिस करार दे डाला। मामला कोर्ट तक पहुंचा तो दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
कोतवाली क्षेत्र के मल्ला गोरखपुर निवासी शिक्षिका इंदु जोशी की मौत 2012 में हो गई थी। किसी परिजन या रिश्तेदार के सामने नहीं आने पर पुलिस ने उनका अंतिम संस्कार किया और घर की चाबी मालखाने में जमा कर दी। कुछ समय बाद आजाद नगर लाइन नंबर छह निवासी लायक हुसैन और हैड़ाखान निवासी देवकी देवी ने मकान पर अपना हक जताया। लायक हुसैन और देवकी ने अदालत से इंदु जोशी की मौत की चार्जशीट की कॉपी मांगी। लायक हुसैन का कहना था कि उसके पक्ष में 30 अप्रैल 2011 और देवकी देवी के नाम दो मई 2011 को वसीयत की गई। सिविल अदालत ने दोनों वसीयत को संदिग्ध माना। साथ ही कहा कि वसीयत अनुचित लाभ के लिए बनाई गई है। अदालत ने पुलिस को आदेश दिया कि दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जाए। पुलिस को जांच में वसीयत फर्जी मिली। भोटिया पड़ाव चौकी प्रभारी प्रताप सिंह नगरकोटी ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
बच्चे से लगाव के कारण वसीयत की
हल्द्वानी। लायक हुसैन का कहना था कि इंदु जोशी उनके बच्चे को पढ़ाती थीं। बच्चों से लगाव के कारण उन्होंने मकान की वसीयत उनके नाम कर दी थी।