हल्द्वानी। एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीनने वाले सैन्यकर्मी के प्रति निशि के मायके वालों में गुस्सा था। सभी मोर्चरी में फफककर रो रहे थे। बड़ी बहन सुषमा तो बदहवास हो गईं। कहने लगीं, लोग झूठ बोल रहे हैं कि निशि वापस आ गई। वह अब कभी नहीं आ सकती। सुषमा चिल्ला-चिल्ला कर कह रही थीं, ‘फौजी मेरी लाडली बहन को मारने से तुझे क्या मिल गया। यदि मेरी बहन पसंद नहीं थी तो क्यों नहीं हमारे पास छोड़ जाता। आखिर क्या गुनाह किया था मेरी बहन ने जो उसका कत्ल कर दिया।’
सुषमा बोली, ‘भगवान से प्रार्थना कर रही हूं कि अनिल को भी ऐसी ही मौत मिले। निशि ने अपने पति के लिए काफी त्याग किया था लेकिन वह पुलिस के नाम पर चिढ़ता था। बेटा चाहता था बेटी पैदा हो गई। करीब 25 दिन पहले वह निशि को लेकर हल्द्वानी आया था।’ पिता रमेश अपनी बड़ी बेटी के सिर पर हाथ रखकर उसे चुप कराने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती। अनिल, तेरा हिसाब भगवान करेगा। दो अन्य बहनें चैनू और मंजू अपनी बहन की पुरानी बातों को याद कर काफी रो रही थीं।
प्रेम विवाह से नाखुश थे अनिल के परिजन
बेटे के प्रेम विवाह करने पर अनिल के परिजन नाराज रहते थे। इसी कारण महिला सिपाही निशि अलग कमरा लेकर रहती थी। बेटी के पैदा होने पर उसने अवकाश लिया था लेकिन वह पति के पास ही रही।
अनिल को ढूंढते कोतवाली पहुंच गई
निशि की तीनों बहनें अनिल सैनी को ढूंढते हुए कोतवाली थाने पहुंच गईं। वह अनिल को लोगों के सामने पीटना चाहती थी लेकिन पूछने पर पता चला कि अनिल कोतवाली आया ही नहीं था। काफी देर तक इंतजार करने और पूछताछ करने के बाद तीनों अपने भाई संजय के साथ चली गईं।