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दावे हवाई, कवायद धरातल पर नजर नहीं आई

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बरसात के चलते हल्द्वानी के पॉलिसीट क्षेत्र में हुआ जलभराव। विज्ञप्ति
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हल्द्वानी। शहर को जलभराव की समस्या से निजात दिलाने की कवायद कई बार हुई, लेकिन इसे धरातल पर उतारने की ईमानदार कोशिश नहीं हुई। ये बातें अमर उजाला के सुधि पाठकों ने व्हाट्सएप पर भेजे गए अपने संदेश के जरिये व्यक्त की हैं। पाठकों की बातें सही भी लगती हैं क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 2017 में सरकार बनने के बाद हल्द्वानी के पहले दौरे में हल्द्वानी का मास्टर ड्रेनेज प्लान बनाने की घोषणा की थी। उनकी इस घोषणा पर अमल होना तो दूर अधिकारी पांच साल बाद भी डीपीआर तक नहीं बना सके।
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विभागीय सूत्रों की माने तो तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा पर डीपीआर बनाने का जिम्मा सिंचाई विभाग हरिद्वार को सौंपा गया था। सिंचाई विभाग फीड बैक इंफ्रा से इसकी डीपीआर बनवा रहा है। पांच साल बाद फिर से भाजपा सरकार आ गई, लेकिन सिंचाई विभाग की डीपीआर तैयार नहीं हुई हैं। हालांकि सूत्रों के हवाले से पता चला है कि डीपीआर का काम अंतिम चरण में है। फीड बैक इंफ्रा ने हल्द्वानी के ड्रेनेज सिस्टम के लिए 1300 करोड़ की डीपीआर बनाई है। इसमें हल्द्वानी क्षेत्र को सात जोन में बांटा गया है। पूरे शहर के पानी को नालों के माध्यम से गौला, भाखड़ा नदी में डालने की योजना है। अब देखना है कि डीपीआर कब शासन के पास मंजूरी के लिए जाती है और कितने दिन बाद इसके लिए बजट पास होता है।
ये है योजना -
जोन वन : काठगोदाम-रानीबाग का पानी कलसिया नाले में डाला जाएगा।
जोन दो : काठगोदाम से गौलारोड, काठगोदाम ब्यूरा और दमुवाढूंगा क्षेत्र का पानी सैंटथरेसा के पास से गौला नदी में डाला जाएगा।
जोन तीन : सैंट पॉल स्कूल से बनभूलपुरा क्षेत्र के पानी को राजपुरा से होते हुए गौला नदी में डाला जाएगा।
जोन चार : - बनभूलपुरा से गौजाजाली उत्तर के पानी को शनिबाजार के पास से रेलवे क्रासिंग के नीचे से गुजराते हुए गौल नदी में डाला जाएगा।
जोन पांच : - सदर बाजार से तीनपानी के पानी को आंवलाचौकी और हाथीखाल के पास गौला फॉरेस्ट में डाला जाएगा।
जोन छह : - बमौरी मल्ली से कमलुवागांजा, रकसिया नाला, पनियाली नाले को भाखड़ा रिवर में डाला जाएगा।
जोन सात : - दमुवाढूंगा से प्रेमपुर लोश्ज्ञानी का पानी फॉरेस्ट में डाला जाएगा।
नगर निगम भी ड्रेनेज के लिए बनवा रहा है प्लान
हल्द्वानी। नगर निगम हल्द्वानी को एडीबी से 2000 करोड़ रुपया मिला है। इसमें से नगर निगम करीब 600 करोड़ रुपया ड्रेनेज सिस्टम में खर्च करना चाहता है। नगर निगम के अधिकारियों को डर है कि कहीं मुख्यमंत्री घोषणा के तहत राज्य सरकार ड्रेनेज सिस्टम के लिए इतनी भारी-भरकम नहीं दे पाई तो हल्द्वानी का ड्रेनेज सिस्टम लंबे समय तक सही नहीं हो पाएगा। इसे देखते हुए नगर निगम भी ड्रेनेज प्लान बना रहा है।
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कोट-
नगर निगम भी ड्रेनेज प्लान बना रहा है। जलभराव की समस्या के मुख्य कारण वॉकवे के पास का नाला, शनिबाजार नाला और रकसिया नाला है। साथ ही कालाढूंगी रोड की जल निकासी भी बड़ी समस्या है। इसे देख कर प्लान बनाया जा रहा है।
पंकज उपाध्याय नगर आयुक्त
जलभराव के लिए अधिकारी भी हैं जिम्मेदार
हल्द्वानी। जलभराव के लिए जिला प्रशासन, नगर निगम, सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। इन विभागों की सड़कों, नाले-नालियों, नहरों पर कब्जा हो गया। कई नहरें बंद कर दी गई। लेकिन विभागीय अधिकारी सिर्फ बारिश से जलभराव होने के बाद जागते हैं फिर जलभराव खत्म होते ही गहरी नहीं में सो जाते हैं। जलभराव के बाद प्रशासन, नगर निगम, सिंचाई, जलसंस्थान के अधिकारियों ने शहर के कई दौरे किए। जलभराव का कारण बन रहे कारणों का पता लगाया। नाले, नहरों का अतिक्रमण चिह्नित किए गए। कई योजनाएं बनाई गईं, लेकिन आठ साल बाद भी योजनाएं फाइलों से बाहर नहीं आईं।
टेढ़ी पुलिया पर नाले पर कब्जा
हल्द्वानी। बल्यूटी क्षेत्र की पहाड़ी में होने वाली बारिश का पानी वॉकवे माल के बगल से होते हुए सीधे गौला नदी में चला जाता था, लेकिन अतिक्रमण के कारण ये नाला संकरा हो गया है। आठ वर्षों से यहीं से हल्द्वानी शहर में पानी घुस रहा है। 2018 में डीएम, मेयर समेत अलग-अलग विभागों के अधिकारियों ने इस नाले का निरीक्षण किया था। अतिक्रमण चिह्नित किए थे। सड़क के नीचे से बड़ा अंडरपास बनाकर इस पानी को गौला नदी में डालने की योजना बनाई थी, लेकिन आठ साल बाद भी योजना कागजों में धूल फांक रही है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग
हल्द्वानी। हल्द्वानी में 98 प्रतिशत सरकारी, प्राइवेट भवनों, शॉपिंग कांपलेक्स में रेन वाटरहार्वेस्टिंग नहीं है। जबकि प्राधिकरण की शर्तों के अनुसार नक्शा पास करने से पहले नक्शे मेंरेन वाटर हार्वेस्टिंग होना अनिवार्य है। प्रशासन-प्राधिकरण ने इसको लेकर कभी कार्रवाईनहीं की। इन सभी भवनों का पानी सड़कों पर आ रहा है।
बारिश का बदलता स्वरूप
हल्द्वानी। हल्द्वानी क्षेत्र में बारिश का स्वरूप लगातार बदल रहा है। सिंचाई विभाग उत्तराखंड ने हल्द्वानी के मास्टर प्लान बनाने के लिए 23 वर्षों का डाटा गौलाबैराज से लिया है। इसके तहत इन 23 सालों में एक दिन की बारिश का औसत 152.96 एमएम है। हल्द्वानी में एक दिन में सबसे अधिक बारिश 2013 में 278.30 एमएम हुई थी। 2010 में 250एमएम, 1990 में 218.80 एमएम, 2016 में 214 एमएम, 2020 में 204.6 एमएम, 2021 में152.96, 2021 में 2012.02 एमएम बारिश हुई। अभी हाल में नौ जुलाई 2022 को एक घंटे में140 एमएम बारिश हुई थी। इससे करीब 1500 घरों में पानी घुस गया था।
जनता बोली
अध्ययन कर समस्या का समाधान का प्रयास करें
शहर में में जलभराव की समस्या विकराल हो गई है। पहले समस्या का पूरा अध्ययन किया जाए, जब तक समस्या का कर अध्ययन कार्य नहीं होगा तब तक समस्या बनी रहेगी। पानी की निकासी के लिए स्थायी नालियां और अस्थायी नालियां बनाई जाए। अधिकारी जिम्मेदारी से काम करें।
-मनोज जोशी, काठगोदाम निवासी
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कार्तिकेय कॉलोनी में जल भराव की समस्या है। दिक्कत को दूर करने के लिए निगम के अधिकारियों से बातचीत हुई, पर अभी तक कोई प्रयास नहीं हुआ। क्षेत्र में पानी की निकासी के लिए नाली आदि का निर्माण कराया जाना चाहिए, जिससे दिक्कत को दूर किया जा सके।
जेपी जोशी, कार्तिकेय कॉलोनी, कुसुमखेड़ा
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बरसाती पानी के निकासी के जो रास्ते थे, वह सभी लगभग बंद हो चुके हैं। सिंचाई नहरों में पालीथिन, कूड़ा फेंकने से भी समस्या उत्पन्न हो रही है। विशेषज्ञों की टीम के माध्यम से पूरे इलाके में जलभराव वाले क्षेत्र, उसके कारणों का पता कर समस्या के समाधान का रास्ता तलाश करना चाहिए।
महिमन सिंह, संगम विहार
हल्की बारिश में ही पालम सिटी के करीब से मानपुर पश्चिम को जाने वाली ग्रामीण सड़क स्वीमिंग पूल में बदल जाती है। बरसात के दौरान घर से निकलना भी दूभर हो जाता है। अच्छा होता अगर प्रशासन इस सड़क पर बरसात के सीजन में नाव की सुविधा भी मुहैया करा दे।
कंचन सनवाल, निवासी वार्ड 56, हल्द्वानी
चौधरी कॉलोनी में लोगों को बरसात के सीजन में आवाजाही के दौरान दिक्कत झेलनी पड़ती हैं। सड़क पर निकलने से पहले कई दफा सोचना पड़ता है। वाहनों से छींटे पड़ने के कारण कपड़े भी खराब हो जाते हैं। सरकार से लेकर प्रशासन को इस समस्या का स्थायी समाधान खोजना चाहिए।
-सुबोध, निवासी बरेली रोड
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नालियों पर अतिक्रमण किया गया है। इसके कारण पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। अवैध कब्जे के कारण समस्या बनी रहती है।
- अरविंद कुमार, नवाबी रोड,
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जल निकासी की समस्या से निपटने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर चौड़ी और गहरी नालियों का निर्माण किया जाना चाहिए। सड़क निर्माण में समस्या को लेकर ध्यान देने की जरूरत है।
-गोविंद बिष्ट, बिंदुखत्ता
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इस दौर में जल भराव की समस्या का समाधान तलाश न कर पाना सोचनीय विषय है। मामूली बारिश में ही मार्ग जलमग्न हो जाते हैं। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
-जानकी पोखरिया, ऊंचापुल हल्द्वानी
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पानी निकासी के ड्रेनेज सिस्टम बना हुआ था, वह किसी न किसी कारण कारगर नहीं रह गया है। पानी निकासी को प्रभावित किया गया है, अवैध कब्जे हो गए हैं। प्रशासन को समस्या के समाधान के लिए सख्ती करनी होगी। कहीं से शिकायत आती है तो तत्काल कार्रवाई की जाए।
- सुनील कुमार पंत, मित्र कॉलोनी मुखानी
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जहां जलभराव की समस्या है, वहां लोगों को भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को पूरी तरह लागू करें। इससे काफी पानी भूमि के अंदर जा सकेगा। शेष पानी निकासी नालों के माध्यम से हो सकेगी।
-पवन कुमार, हल्द्वानी
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जलभराव हल्द्वानी के लिए नई बात नहीं है। हल्की बारिश में सड़कें तलैया बन जाती हैं। इसके कारण पैदल चलने वालों को खास तौर पर परेशानी होती है। इस दिक्कत को जल्द से जल्द दूर किया जाए।
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-मनन शर्मा, छात्र।
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