रामनगर (नैनीताल)। चर्चित रोहित कांड में पुलिस की ओर से बनाए गए सभी आरोपियों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख समेत 20 आरोपियों पर दर्ज मुकदमे वापस ले लिए हैं। न्यायालय ने भी सरकार के आग्रह को स्वीकार करते हुए आरोपियों को बरी कर दिया है।
अधिवक्ता दीपक जोशी ने बताया कि चार नवंबर 2014 को तत्कालीन एसएसआई मोहन चंद्र पांडे ने आरोपियों के खिलाफ धारा 147, 146, 427, 309, 34 आईपीसी, 7 क्रिमिनल एक्ट में केस दर्ज किया था। पुलिस ने तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी, दीप गुणवंत, तनुज दुर्गापाल, गोधन फर्त्याल, विमला रावत, आशा बिष्ट, प्रीतम आर्या, भीम रावत, नवीन नेगी, कपिल रावत, चंचल जोशी सहित 20 लोगों को आरोपी बनाया था। मुकदमे में ट्रायल के दौरान ही दो लोग कपिल रावत और चंचल जोशी की मौत हो गई थी। अधिवक्ता ने बताया कि मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट कुलदीप नारायण की अदालत में चल रहा था।
जनवरी 2024 में सरकार ने किया आग्रह
अधिवक्ता दीपक जोशी ने बताया कि अब प्रदेश सरकार ने इस मुकदमे को वापस लेने के लिए जनवरी 2024 के अंतिम सप्ताह में आग्रहपत्र न्यायालय में पेश किया था। इस पर न्यायिक मजिस्ट्रेट कुलदीप नारायण ने सरकार के आवेदन को छह फरवरी को स्वीकार कर लिया है।
यह था मामला
नवंबर 2014 में लखनपुर स्थित पानी की टंकी पर कुछ छात्र नेता आत्मदाह की धमकी देते हुए चढ़ गए थे। इसमें छात्र नेता रोहित पांडे बुरी तरह झुलस गया था जिसकी दिल्ली में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस ने 20 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। तब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और हरीश रावत सीएम थे। छात्र नेता रोहित की मौत के बाद रामनगर में जनाक्रोश भी फैल गया था। सरकार की ओर सीबीसीआईडी जांच शुरू हुई, लेकिन मृतक के बयानों के आधार पर हत्या का प्रयास और हत्या की धारा को सीबीसीआईडी को हटाना पड़ा।