हल्द्वानी। अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज बनवाकर प्रतिभाग करने पहुंचे ताहिर के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही जिस जनसेवा केंद्र से उसने दस्तावेज तैयार कराए थे उसके संचालक पर भी केस दर्ज किया गया है। एसडीएम की जांच रिपोर्ट में जन सेवा केंद्र से गड़बड़ी की बात सामने आई है।
रानीखेत में चल रही अग्निवीर भर्ती में दौड़ निकालने वाले अमित नाम के लड़के पर जब सैन्य अधिकारियों को शक हुआ तो उन्होंने उसके शैक्षिक और निवास के कागजातों की तस्दीक की थी। जांच में कागजात किसी अन्य व्यक्ति के नाम से जारी होना पाया गया और फर्जीवाड़ा करने वाले बनभूलपुरा थाना क्षेत्र के रेलवे बाजार निवासी ताहिर को पुलिस के हवाले कर दिया था। छानबीन में पता चला कि ताहिर ने फर्जी निवास प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेज हल्द्वानी से तैयार कराए थे। मामले की जांच राजस्व उप निरीक्षक दीपक टम्टा को सौंपी गई थी। जांच में पता चला कि ताहिर ने निवास प्रमाण पत्र के लिए बनभूलपुरा स्थित शनिबाजार रोड निवासी नासिर अली के जन सेवा केंद्र से आवेदन किया था। बताया कि आवेदन के दौरान ताहिर ने नए और पुराने आधार कार्ड और राशन कार्ड की फोटो कॉपी भी लगाई थी। वहीं गड़बड़ी तब की गई जब संबंधित कागजातों की मूल प्रति को स्कैन करके लगाया जाता है। जनसेवा केंद्र संचालक नासिर ने मूल की जगह फर्जी प्रमाण-पत्रों की कॉपी स्कैन की थी। जांच के बाद राजस्व उप निरीक्षक की तहरीर पर बनभूलपुरा पुलिस ने ताहिर और नासिर के खिलाफ कूटरचित दस्ताबेजों को तैयार करने की धारा के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
ऑनलाइन प्रणाली के चलते आती हैं इस तरह की दिक्कतें
जांच के दौरान राजस्व उप निरीक्षक ने बताया कि पहले प्रमाण पत्र तैयार कराने के लिए आवेदक को तहसील कार्यालय में पहुंचकर कागजातों की मूलप्रति दिखानी पड़ती थी और उसका भौतिक सत्यापन होने के बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाता था। वहीं अब सत्यापन का काम जन सेवा केंद्र संचालकों का होता है। ऑनलाइन आवेदन होने के बाद स्कैन कॉपी अधिकारी के पास ऑनलाइन ही पहुंचती है और वह प्रमाण पत्र स्वीकृत करता है। हालांकि उसके सत्यापन की जिम्मेदारी सीएससी सेंटर संचालक को पूरी करनी चाहिए।