हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विवि की एक अगस्त से परीक्षाएं होनी हैं लेकिन पढ़ने के लिए किताबें अब तक पूरी नहीं पहुंच पाई हैं। किताबों के लिए कई बार विवि के चक्कर काटने के बाद भी विद्यार्थियों को खाली हाथ लौटना पड़ा है। किताबों की तत्काल व्यवस्था करने के बजाय छात्र-छात्राओं को ई-बुक से पढ़ने के लिए कहा जा रहा है। विवि प्रशासन का कहना है कि कागज महंगा होने के कारण टेंडर के बाद किताबें नहीं छप पाईं। अब इसका खामियाजा भी यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
यूओयू से हजारों छात्र विभिन्न विषयों की पढ़ाई कर रहे हैं। यूजी और पीजी में कई विषय ऐसे हैं जिनकी किताबें नहीं आई हैं। किताबें न मिलने से वह परेशान हैं।
जल्द ही परीक्षाएं भी होने वाली हैं। ऐसे में परीक्षार्थी उत्तर पुस्तिकाओं में क्या लिखेेंगे और ई-बुक से कितना पढ़ लेंगे यह प्रश्न बना हुआ है।
विवि प्रशासन का कहना है कि कोरोना के बाद से कागज के दाम काफी बढ़ गए हैं। चार फर्मों से यूओयू के लिए किताबें छपती हैं।
इस बार किताबों के टेंडर तो हुए लेकिन कागज के दाम महंगे होने के कारण किताबें नहीं छप पाईं।
वर्ष 20219-20 में जिस फर्म से किताबें छपवाई गईं थी। उसी से किताबों की व्यवस्था की गई है लेकिन किताबें अब तक पूरी नहीं आ पाई हैं। कोशिश की जा रही है कि परीक्षाएं शुरू होने से पूर्व विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध करा दी जाएं।
कोट
परीक्षाओं से पूर्व विद्यार्थियों को सभी किताबें उपलब्ध कराने कोशिश की जा रही है। चार फर्मों से यूओयू की किताबें छपती हैं। कागजों के दाम महंगे होने के कारण इस वर्ष टेंडर के बाद भी किताबें नहीं छप पाईं। वर्ष 2019-20 में जिस फर्म से किताबें छपवाई गईं थी। उसी से किताबों की व्यवस्था की जा रही है। - प्रो. पीडी पंत, कुल सचिव यूओयू।