हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में शुक्रवार को ट्रामा सेंटर के बाहर तीमारदार जमीन पर सोये नजर आये। तीमारदारों के सोने के लिए अस्पताल में इंतजाम नहीं हैं।
अस्पताल में बने रैनबसेरे को कुछ साल पहले चोरी और महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ की वारदातों के चलते बंद कर दिया गया था। जिसके बाद से अस्पताल में तीमारदारों के रुकने के लिए स्थायी व्यवस्था नही है। ऐसे में मरीजों के तीमारदार अस्पताल में फर्श पर सोने को मजबूर हैं। शुक्रवार को ऐसा ही नजारा ट्रामा सेंटर के बाहर देखने को मिला। जहां दूर दराज से आए मरीजों के तीमारदार अस्पताल में रुकने की व्यवस्था नहीं होने के कारण फर्श पर पड़े रहे। ऐसे में जमीन पर बेतरतीब सोए तीमारदारों पर भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है। रामनगर से अपनी चाची का इलाज कराने पहुंचे अनस खान ने बताया कि दो दिन से अस्पताल में रुका हुआ है लेकिन यहां पर रहने के लिए इंतजाम नहीं होने के कारण उन्हें फर्श पर रात गुजारनी पड़ रही है। वहीं काशीपुर से अपने पिता का इलाज कराने पहुंचे दिनेश ने बताया कि उनके पिता ट्रामा सेंटर में एडमिट हैं। ऐसे में उन्हें दवाइयों और उनकी देखभाल के लिए परिवार के अन्य सदस्यों को भी रुकना पड़ रहा है। रहने का कोई इंतजाम नहीं होने से फर्श पर ही सो रहे हैं। यहां रात में मच्छर भी परेशान कर रहे हैं। मलेरिया और डेंगू का खतरा भी बना हुआ है।
सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, डॉ. अरुण जोशी ने कहा कि पहले अस्पताल में तीमारदारों के रुकने के लिए रैन बसेरे की व्यवस्था थी। यहां चोरी और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ होने के कारण उसे बंद कर दिया गया था। अब मरीज के साथ आने वाले एक तीमारदार को मरीज के साथ रुकने दिया जाता है लेकिन मरीज के साथ पूरा परिवार आता है तो उनके लिए स्थायी व्यवस्था नहीं है।