नैनीताल में विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करती आशा कार्यकर्ता
नैनीताल। केंद्रीय ट्रेड यूनियन एवं संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आशा कर्मियों ने एक दिनी हड़ताल कर आशा कर्मियों व विभिन्न योजनाओं में कार्य कर रहे कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बाद में डीएम के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजा।
तल्लीताल स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष नारेबाजी के बीच हुई सभा में आशा यूनियन की प्रदेश अध्यक्षा कमला कुंजवाल ने कहा कि राज्य के ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य सेवा की बुनियाद के रूप में आशा वर्कर्स सेवाएं देती आ रही हैं। आशाओं की सेवाओं के चलते आज सरकारी संस्थागत प्रसव और जन्म मृत्यु दर में सुधार हुआ है। मातृ शिशु मृत्यु दर में भी राष्ट्रीय स्तर पर कमी हुई है। कहा कि कोरोना महामारी के समय आशाओं ने अपनी जान जोखिम में डाल कर लगन के साथ हर काम पूरा किया। लेकिन सरकार ने पिछले एक दशक से से आशाओं की मेहनताना राशि (प्रोत्साहन राशि) व सेवा शर्तों में कोई वृद्धि नहीं की है।
कहा कि पिछले दिनों सरकार की ओर जारी बजट में भी आशाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने आशा वर्कर्स को नियमित मासिक वेतन देने, राज्य कर्मचारी का दर्जा व सेवानिवृत्त होने पर सभी आशाओं को अनिवार्य पेंशन का प्रावधान करने की मांग की। कहा कि सेवानिवृत्त होने वाली आशा वर्कर्स को जब तक पेंशन योजना का लाभ नहीं दिया जाता तब तक सेवानिवृति के समय दस लाख रुपये का भुगतान किया जाए। पल्स पोलियो अभियान के दौरान आशाओं को मेहनताना दिया जाए। प्रदर्शन करने वालों में मुन्नी बिष्ट, दुर्गा टम्टा, भगवती, हेमा, दीपा, बबीता समेत अन्य शामिल थे।