नैनीताल। हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय देते हुए कहा है कि किसी आरोपी के खिलाफ मामले में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल होने के बावजूद उसे अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) दी जा सकती है। तीन सदस्यीय पीठ में दो न्यायाधीशों ने इसके पक्ष और एक ने विपक्ष में अपनी राय दी थी जिसके बाद बहुमत से फैसला मान्य किया गया।
हाईकोर्ट में कुछ समय से यह कानूनी बहस चल रही थी कि किसी मामले में यदि जांच के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो जाती है तो उसे अग्रिम जमानत दी जा सकती है या नहीं। एक सदस्यीय पीठ ने मामले को बड़ी बेंच को संदर्भित किया था। सभी पक्ष सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में निर्णय को सुरक्षित कर लिया था। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी, वरिष्ठ न्यायमूर्ति मंनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की तीन सदस्यीय बेंच ने अपना निर्णय सुनाया। इसमें मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की ओर से फैसला देते हुए कहा गया कि ऐसी परिस्थिति में चार्जशीट दायर होने के बाद भी आरोपी को एंटीसिपेटरी बेल दी जा सकती है, जबकि न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी का मत था कि चार्जशीट के बाद अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए। ऐसे में बहुमत के आधार पर न्यायालय ने चार्जशीट के बावजूद अग्रिम जमानतों को दायर करने की की अनुमति दे दी है।
यह था मामला
हरिद्वार निवासी सौभाग्य भगत को अपनी भाभी याशिका गौतम की दहेज हत्या में सह आरोपी बनाया गया था। सौभाग्य सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। जिस दिन उनकी भाभी की हरिद्वार में दहेज हत्या का आरोप है उस दिन वह सुप्रीम कोर्ट में थे। सौभाग्य भगत के अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने बताया की कोर्ट को उनके सुप्रीम कोर्ट में घटना के दिन उपस्थित होने के वीडियो फुटेज सहित कई प्रमाण दिए गए थे जिसके बाद सौभाग्य को अंतरिम रूप से अग्रिम जमानत हाईकोर्ट से मिल गई थी। उसके बाद उनके विरुद्ध चार्जशीट दाखिल हो गई। चार्जशीट दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ का मत था कि अब अग्रिम जमानत जारी नहीं रह सकती है। इसके बाद याचिका करता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णय अपने पक्ष में प्रस्तुत किए गए और कानूनी प्रश्न पैदा होने पर एकल पीठ की ओर से यह मामला खंडपीठ को संदर्भित कर दिया गया था।
इसलिए गठित हुई तीन सदस्यीय पीठ
दो सदस्यीय खंडपीठ का निर्णय आने के बाद बाद भी एकल पीठ के सामने यह प्रश्न था कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मामलों में यह निर्णय दिया हुआ है कि अंतरिम जमानत मात्र पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की आशंका पर दायर की जा सकती है जबकि चार्जशीट दायर होने के बाद पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की आशंका नहीं रहती। दोबारा से कानूनी विषमता पैदा होने पर एकल पीठ की ओर से मामले को बड़ी पीठ को संदर्भित किया गया था। जिसके बाद तीन सदस्यीय पीठ का गठन किया गया।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता का पक्ष
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मैनाली ने बताया तीन सदस्यीय पीठ का निर्णय आने के बाद इस संबंध में कानूनी स्थिति स्पष्ट हो गई है जिससे कि सत्र न्यायालय के सामने भी अब आरोप पत्र दायर होने के बाद भी आरोपी के सामने अग्रिम जमानत दाखिल करने का अवसर रहेगा।