नैनीताल। हाईकोर्ट ने देहरादून में मटन और चिकन की दुकानों में बिना परीक्षण मीट बेचे जाने के मामले में राज्य सरकार, नगर निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अगले साल मार्च में होगी।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी विकेश सिंह नेगी ने जनहित याचिका दायर में कहा था कि देहरादून का एकमात्र स्लॉटर हाउस चार साल पहले ही बंद हो चुका है। दुकानों में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के बिना ही मीट बेचा जा रहा है। मीट कहां काटा जा रहा है इससे नगर निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग बेखबर है। याचिका के अनुसार दून में बने बूचड़खाने को वर्ष 2018 में बंद कर दिया गया था, तब से बिना जांच के मीट बेचा जा रहा है। याचिकाकर्ता का कहना था कि नगर निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई कि 2016 में नगर निगम की ओर से बनाए गए उस नियम को लागू किया जाए जिसके तहत बकरे और मुर्गे की जांच के बाद ही स्लाटर हाउस में काटने का प्रावधान था।
दो विभाग एक दूसरे पर लगा रहे हैं आरोप
याचिका के अनुसार जब आरटीआई मांगी गई तो खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निगम एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने लगे। खाद्य सुरक्षा विभाग ने कहा कि यह जिम्मेदारी नगर निगम है क्योंकि नगर निगम ही दुकानों का आवंटन व किराया ले रहा है। जबकि नगर निगम का कहना है कि इनका लाइसेंस खाद्य सुरक्षा विभाग देता है इसलिए जांच करने की जिम्मेदारी भी उसी की है।