अहोई अष्टमी का व्रत एक नवंबर रविवार को रखा जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन सप्तमी तिथि दोपहर 2:52 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। तारा दर्शन से पहले अष्टमी तिथि लगने के कारण अहोई देवी का पूजन संध्या काल में किया जाएगा।
ज्योतिष अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि दो नवंबर को अष्टमी तिथि दोपहर 1:11 बजे तक रहेगी। ऐसे में अहोई अष्टमी का व्रत एक नवंबर को ही रखा जाएगा जबकि मासिक अष्टमी का व्रत करने वाले श्रद्धालु दो नवंबर को व्रत करेंगे।
जिन परिवारों में अहोई देवी के पूजन की परंपरा चली आ रही है, वहां महिलाएं एक नवंबर को व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करेंगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अहोई देवी को धन और संतान की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। उनकी पूजा-अर्चना से पारिवारिक कष्ट दूर होते हैं। मान्यता है कि अहोई देवी का व्रत करने से सुख, सौभाग्य और संतान की प्राप्ति होती है।