डॉक्टर की पर्ची के बिना मेडिकल स्टोर संचालक मेडिकल टर्मिनेशन गर्भावस्था (एमटीपी) किट नहीं बेच सकते, लेकिन इसे ऑनलाइन बेचने वाले दलालों का ग्रुप सक्रिय है। इसके बावजूद प्रशासन की इस पर कोई नजर नहीं है। ऐसे में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए यह गंभीर खतरा बन सकता है। कई मामलों में यह किट गर्भावस्था के नौ सप्ताह से अधिक अवधि में भी दी जा रही है, जो गंभीर समस्या बन सकती है।
शहर में गुपचुप तरीके से यह खेल चल रहा है। मामले की पड़ताल की गई तो पता चला कुछ वेबसाइट डॉक्टर का पर्चा अपलोड करने पर ही डिलीवर कर रही हैं। इंडिया मार्ट जैसी वेबसाइट बिना किसी पर्चे और अन्य जानकारी लिए किट मुहैया करा रही हैं। मामले की तह तक जाने के लिए रिपोर्टर ने खुद को मेडिकल स्टोर संचालक बताया और बल्क में आर्डर देने की बात कही तो एक बार में 15 किट देने के लिए संबंधित कंपनी के कर्मचारी ने हामी भर दी। इसके बाद जब रेट को लेकर बात हुई तो 800 रुपये वाली किट 600 में देने की बात कही। वहीं ऐसे ही जब कई कंपनियों के प्रतिनिधियों से बात की गई तो 500 रुपये में सौदा तय हो गया।
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत गर्भपात से जुड़ी दवा केवल पंजीकृत डॉक्टर की सलाह पर ही बेची जा सकती है, लेकिन ऐसी वेबसाइटों पर कोई नियंत्रण न होने से यह दवा आसानी से हर किसी के हाथ में पहुंच रही है।
क्या कहता है कानून
- एमटीपी एक्ट 1971 के तहत गर्भपात कराने के लिए डॉक्टर की अनुमति और निगरानी जरूरी है।
- बिना चिकित्सकीय परामर्श के गर्भपात कराना गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है।
- ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के मुताबिक, गर्भपात की दवा बिना डॉक्टर के परामर्श के बेचना अवैध है।
किट का उपयोग गर्भपात के लिए डॉक्टर की निगरानी में किया जाना चाहिए, लेकिन बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श के इन दवाओं का सेवन करने से महिलाओं को भारी रक्तस्राव, गर्भाशय में संक्रमण, अधूरा गर्भपात और यहां तक कि मृत्यु तक का खतरा हो सकता है। ड्रग विभाग से ऐसे मामलों की जांच करने के लिए कहा जाएगा। - डा. एचसी पंत, सीएमओ नैनीताल
मेडिकल स्टोर और झोलाछाप डाक्टरों के खिलाफ छापे मारकर लगातार अभियान चला रहे हैं। ऐसा प्रकरण सामने नहीं आया है लेकिन ऑनलाइन बिक्री पर अंकुश लगाना मुश्किल है। इसके लिए सरकार को खास एडवाइजरी जारी करनी चाहिए। बिना चिकित्सकीय परामर्श के किट बेचना गैरकानूनी है। - मीनाक्षी बिष्ट, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक