फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उच्च न्यायिक सेवा की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

विज्ञापन
विज्ञापन
नैनीताल। उच्च न्यायालय ने प्रदेश में उच्च न्यायिक सेवा की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई की। उच्च न्यायालय की अधिवक्ता अंजलि नौलियाल ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश में उच्च न्यायिक सेवा के लिए पिछले साल 18 अप्रैल को विज्ञापन जारी हुआ था। प्राथमिक परीक्षा 19 जुलाई तथा मुख्य परीक्षा 28 नवंबर 2017 को हुई। साक्षात्कार चार और पांच जनवरी को हुए। प्रदेश में हुई उच्च न्यायिक सेवा की परीक्षा में अब तक किसी अनुसूचित जाति के अभ्यर्थी का चयन नहीं हुआ है। इस बार याची ने भी परीक्षा दी है, जो कि महिला व अनुसूचित वर्ग से है। याची के मुताबिक परीक्षा प्रणाली में कई खामियां हैं। तीसरे प्रश्न पत्र का पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए। परीक्षा आयोजक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता ने याचिका में उठाए गए सवालों को गलत ठहराया। अधिवक्ता ने कहा कि परीक्षा में सामान्य वर्ग के लिए प्रत्येक प्रश्न पत्र में न्यूनतम 40 प्रतिशत और कुल 50 प्रतिशत अंक लाने की न्यूनतम योग्यता का मानक है। आरक्षित वर्ग के लिए यह व्यवस्था 30 और 40 प्रतिशत है। पुनर्मूल्यांकन को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के रण विजय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2017 ) के फैसले की जानकारी दी गई। इस फैसले में स्पष्ट कर दिया गया है कि पुनर्मूल्यांकन का फैसला लेने का अधिकार केवल परीक्षा आयोजक को है। खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें