हल्द्वानी/हल्दूचौड़। गौला नदी के खनिज निकासी गेटों पर ई-रवन्ना जारी करने वाले कर्मियों के बृहस्पतिवार को कार्य बहिष्कार पर जाने से अलग-अलग गेटों पर 2376 खनिज वाहन फंस गए। वन निगम शुक्रवार को फंसे हुए वाहनों को बाहर निकालने की बात कह रहा है।
गौला नदी के 11 खनिज निकासी गेटों के माध्यम से खनन होता है। यहां पर तौल कांटे पर भार की जांच के साथ ई-रवन्ना जारी करने की व्यवस्था है। अब तक यह कार्य वन निगम आउटसोर्स के माध्यम से करता था, इसमें करीब 40 कर्मचारी काम करते थे। कर्मचारियों का कहना था कि दिसंबर से काम कर रहे हैं और उन्हें वेतन नहीं मिला है। वन निगम के अधिकारियों का रवैया भी सहयोगपूर्ण नहीं है। इन कर्मियों के कार्य बहिष्कार पर जाने से हजारों वाहन गौला नदी के अंदर फंस गए। बिना ई-रवन्ना के वाहन बाहर नहीं आ सकते थे। बाद में वन निगम ने वैकल्पिक व्यवस्था कर गेटों से वाहन निकालने का काम शुरू किया। बावजूद अलग-अलग गेटों पर 2376 वाहन नदी क्षेत्र में फंसे हुए हैं। सबसे ज्यादा लालकुआं और बेरीपड़ाव गेट पर क्रमश: 766 और 640 वाहन फंसे हैं। डीएलएम धीरेश बिष्ट का कहना है कि कर्मियों के कार्य बहिष्कार पर जाने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था कर वाहनों को निकाला गया है। शेष फंसे वाहनों को शुक्रवार को निकाला जाएगा। मामले में कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। कर्मियों के लंबित वेतन के मामले को हल करने का प्रयास किया जा रहा है।
पहले ई-रवन्ना का काम वन निगम के आउटसोर्स के माध्यम से रखे गए कर्मियों के माध्यम से होता था। अब यह कार्य निजी क्षेत्र को दिया जा रहा है। इसमें सीसीटीवी, इंटरनेट और ई-रवन्ना काटने की व्यवस्था संबंधित संस्था को करनी होगी। यह कार्य नियमानुसार किया जा रहा है। कर्मियों के वेतन का मामले को हल करने की भी कोशिश हो रही है।
महेश आर्य, आरएम वन निगम