हल्द्वानी। नंधौर वन्य जीव अभ्यारण्य में बाघों की सुरक्षा के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), वन विभाग और ज्योलॉजिकल सोसायटी ऑफ लंदन (जेडएसएल) संयुक्त तौर पर परियोजना शुरू की है। इसी क्रम में मंगलवार को प्रमुख वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. डीवीएस खाती के नेतृत्व में अधिकारियों के दल ने नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य में चोरगलिया, जौलासाल का संयुक्त निरीक्षण किया। इस दौरान आयोजित कार्यशाला में डॉ. खाती ने बताया कि परियोजना में प्रथम पंक्ति जैसे वनरक्षक, दरोगाओं की क्षमता का विकसित किया जाएगा। इसमें उन्हें बाघों के निगरानी से गणना तक जरूरी सुझाव दिए जाएंगे। कर्मचारियों को प्रोजेक्टर के साथ ही डिमांस्ट्रेशन ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इस दौरान मुख्य वन संरक्षक डॉ. कपिल जोशी, वन संरक्षक डॉ. पराग मुधकर धकाते, डीएफओ चंद्रशेखर सनवाल, नीतिशमणि त्रिपाठी, कल्याणी, एचके सिंह आदि थे।
परियोजना के ये हैं चार प्रमुख उद्देश्य
- वन विभाग के प्रथम पंक्ति वॉचर, गार्ड, दरोगा की क्षमता विकसित करना
- मानव वन्य जीव संघर्ष की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाना
- ग्रामीणों की जंगल पर निर्भरता खत्म करने के लिए आजीविका के साधन बढ़ाना
- कानून का पालन कराने वाले दलों को प्रशिक्षित करना