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जलस्त्रोतों के संरक्षण से ही बचाया जा सकता है पानी

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नैनीताल। वैकल्पिक जल ऊर्जा केंद्र, भारतीय प्रोद्यौगिक संस्थान रुड़की और कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के सहयोग से हरमिटेज भवन में बृहस्पतिवार को उत्तराखंड के जल संसाधनों को बचाने के लिए भागीदारी विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिका के एक शोध के तहत उत्तरी भारत में वर्ष 2002 से 2008 तक 109 घन किलोमीटर क्षेत्रफल से अधिक भू-जल स्तर में कमी आई है। इसलिए जलस्रोतों को रिचार्ज करने की आवश्यकता है। जल स्रोतों के संरक्षण से ही पानी को बचाया जा सकता है। इस दौरान स्लाइड शो के माध्यम से कई बिंदुओं पर चर्चा की गई। इससे पूर्व मुख्य अतिथि डीएसबी परिसर निदेशक प्रो. एलएम जोशी तथा विशिष्ट अतिथि पूर्व निदेशक प्रो.एसपीएस मेहता ने कार्यशाला का दीप जलाकर शुभारंभ किया। मुख्य आयोजक प्रो. बीएस कोटलिया ने कार्यशाला में जल संसाधनों के संरक्षण के बारे में बताया। इस मौके पर कार्यक्रम के सह संयोजक प्रो. राजीव उपाध्याय, प्रो. सीसी पंत, पंकज तिवारी, डॉ. पीके राय, प्रो. विभूति राय, डॉ. द्रोपति रावत, डॉ. अजय कुमार, लक्ष्मी नेगी, डॉ. सुरेंद्र सिंह नकदली, डॉ. प्रदीप रावत, डॉ. अनिल कुमार सिंह, राजेंद्र सिंह बिष्ट, प्रो. पीसी तिवारी, डॉ. भगवती जोशी, प्रो. ज्योति प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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