रामनगर (नैनीताल)। सरोकार की मासिक कवि गोष्ठी सोमवार को मोहल्ला खताड़ी स्थित शायर सगीर अशरफ के आवास पर हुई। डॉ. एसपी मिश्र ने वंदना सुनाकर शुभारंभ किया। काशीपुर के विक्रम दवे ने प्रेमगीत गाया। अमीन जसपुरी ने सत्ता की ओर इशारा करते हुए कहा ‘वो सत्ता के लिए तो आस्था से खेल सकता है, मगर जनता की बेचैनी कहां शासन समझता है’। बरेली से आए वरिष्ठ शायर सैय्यद हलीम हुसैन जैदी ने गजलों से सबकों अभिभूत कर दिया, ‘चांद को बनने-संवारने की जरूरत क्या है, फूल को इत्र लगाने की जरूरत क्या है’। युवा कवि संतोष कुुमार तिवारी ने उत्तराखंड महिमा का पाठ किया, ‘तिनका-तिनका जहां का चंदन है, देवभूमि तुम्हारा वंदन है’। विभा शुक्ला ने गीत पढ़ा ‘कैसे नजर ए नूर नासूर बन गया’। देेवेश उपाध्याय के शेर सराहे गए ‘शबनमी बूंदों के हवाले हैं, सुबह की तस्वीर दिल का उजाला कुछ अपनी बात कहता है’। डॉ. एसपी मिश्रा ने गीत गुनगुनाया ‘जब-जब तुम्हारे गीतों को गुनगुनाता हूं मैं तब-तब न जाने क्यों फिर मुस्कुराता हूं मैं’। सगीर अशरफ का शेर था ‘धूप के दस्ताने हाथों में पहनकर बर्फ की चादर उतारी जा रही है’। जमीला सगीर, रूबी अख्तर, फरजाना ने भी कविताएं सुनाईं।