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साक्ष्य के अभाव में हत्यारोपी हाईकोर्ट ने बरी

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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा पाये तीन हत्या आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
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वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार 14 जून 2006 को हैड़ाखान निवासी महेंद्र पाल (पिता ), भाई इंद्रपाल व रवी पाल ने अपनी बहन पूजा की हत्या की थी। भाइयों का कहना था कि बहन का पड़ोस में रहने वाले राकेश के साथ अनैतिक संबंध थे। 14 जून 2006 को अपनी बहन को वे हैड़ाखान की तरफ ले गए। जाते समय पूजा के साथ उनके पिता भी थे। आतेे वक्त तीन लोग ही वापस आए। इसकी सूचना मुखबिर ने पुलिस को दी। पुलिस ने पूछताछ के लिए महेंद्र पाल और रवि पाल को पकड़ लिया और इंद्रपाल भाग गया। पुलिस की ओर से पूछने पर रबिपाल ने बताया कि उन्होंने मिलकर पूजा का कत्ल कर दिया है। खून से सने कपड़े और चाकू भी निशानदेही पर पुलिस ने बरामद कर लिए। 26 मार्च 2012 को निचली अदालत ने तीनों हत्या आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस आदेश के खिलाफ अभियुक्तों ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की। पक्षों की सुनवाई के बाद खंडपीठ ने तीनों अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव बरी कर दिया।
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