नैनीताल। लोक निर्माण विभाग के करीब 50 कर्मियों के नियमितीकरण को निरस्त करने वाले शासनादेश पर हाइकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने सरकार से इस मामले में चार सप्ताह में जवाब मांगा है। लोक निर्माण विभाग में कार्यरत गिरीश चंद्र थपलियाल सहित 50 अन्य कर्मियों को 2014 में नियमित कर दिया गया था। विभाग के अपर सचिव ने आठ, नौ, 13 जून 2017 को आदेश जारी कर इनका नियमितीकरण निरस्त कर दिया था। शासन के इसी आदेश को गिरीश चंद्र थपलियाल व अन्य ने हाइकोर्ट में चुनौती दी। इनकी ओर से दायर की गई याचिका में गिरीश चंद्र थपलियाल का कहना था कि वह नेशनल हाइवे सर्किल में दैनिक वेतन भोगी के रूप में चौकीदार के पद पर 2001 से कार्यरत हैं। विभागीय योजना के तहत 2014 में उसे नियमित कर दिया गया था। बाद में शासन ने उसके नियमितीकरण के आदेश को निरस्त कर दिया। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी ने कर्मचारियों के नियमितीकरण को निरस्त करने वाले शासनादेश पर रोक लगा दी। इससे अब ये कर्मचारी फिर से नियमित हो गए हैं। कोर्ट ने इस मामले में सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
लोक निर्माण विभाग के 50 से अधिक कर्मचारी ने दायर की थी याचिका
2014 में नियमित इन कर्मचारियों के नियमितीकरण को शासन 2017 में किया था निरस्त
हाइकोर्ट ने सरकार से चार सप्ताह में मांगा जवाब, अब ये कर्मचारी फिर से नियमित