जमरानी बांध पुनर्वास योजना पर लगीं आपत्तियां
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
जमरानी बांध पुनर्वास योजना को लेकर प्रभावितों ने 100 आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इनमें से अधिकतर आपत्तियां प्रथम श्रेणी में नाम दर्ज करने और तृतीय श्रेणी में नाम छूटने को लेकर हैं। एडीएम की अध्यक्षता में अप्रैल में होने वाली बैठक में आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा।
जमरानी परियोजना इकाई की ओर से फरवरी में जारी पुनर्वास योजना के तहत 1236 परिवार विस्थापन की श्रेणी में आ रहे हैं। इसमें 209 परिवार प्रथम श्रेणी, 822 परिवार द्वितीय श्रेणी और 205 परिवार तृतीय श्रेणी में शामिल किए गए हैं। इनमें विस्थापितों की भूमि और संपत्तियों का संपूर्ण ब्यौरा दर्ज है। विभाग की ओर से प्रभावितों को आपत्तियां दर्ज करने के लिए एक माह का समय दिया गया था। कुछ प्रभावितों के नाम खतौनी में दर्ज नहीं है इसलिए उन्होंने रियायत मांगी है। कुछ प्रकरण मृत्यु संबंधी हैं जिनमें बच्चों के नाम जमीन हस्तांतरित नहीं हुई है। वहीं दो मामले ऐसे भी हैं जिनमें पति और पत्नी लंबे समय से अलग रह रहे हैं। महिलाओं ने भी पति के हिस्से से मुआवजा दिये जाने की मांग की है।
जमरानी बांध संघर्ष समिति के अध्यक्ष नवीन पलड़िया ने मांग उठाई है कि प्रभावितों की आपत्तियों पर सरकार और प्रशासन गंभीरता से विचार करते हुए अधिक से अधिक आपत्तियों का निस्तारण करे। प्रभावितों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाए।
जमरानी परियोजना इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर संजय कुमार सिंह का कहना है कि पुनर्वास योजना पर प्रभावितों की ओर से करीब 100 आपत्तियां दर्ज की गई हैं। आपत्तियों के निस्तारण के लिए एडीएम की अध्यक्षता में प्रभावितों के साथ बैठक की जाएगी।
सिंचाई विभाग को जमीन हस्तांतरित करने की मांग
जमरानी बांध संघर्ष समिति ने पुनर्वास स्थल प्राग फार्म की जमीन सिंचाई विभाग को हस्तांतरित करने की मांग की है। समिति के अध्यक्ष नवीन पलड़िया का कहना है कि सिंचाई विभाग के नाम जमीन नहीं होने से टाउन प्लानिंग का कार्य शुरू नहीं हो सका है। इससे पुनर्वास कार्यों में देरी हो रही है। इससे प्रभावितों में आक्रोश है।
पीआईबी से जल्द हरी झंडी मिलने की उम्मीद
जमरानी बांध परियोजना को पब्लिक इंवेस्टमेंट बोर्ड से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। पूर्व में दिल्ली में हुई पीआईबी की बैठक में सिंचाई विभाग ने सभी प्रश्नों पर पीआईबी को जवाब प्रस्तुत कर दिये हैं। एक हफ्ते के भीतर इस पर बड़ा फैसला हो सकता है। पीआईबी से स्वीकृति मिलने के बाद जमरानी की फाइल पीएमओ को जाएगी। इसके बाद संबंधित मंत्रालय से बजट स्वीकृत होगा।