साक्ष्यों के अभाव में नहीं मिली राहत
कोटद्वार। पति और ससुराल पक्ष पर घरेलू हिंसा, मारपीट और दहेज के लिए रुपये मांगने का आरोप लगाने वाली महिला को अपीलीय अदालत से भी राहत नहीं मिली। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) रजनी शुक्ला की अदालत ने महिला की आपराधिक अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि उपलब्ध मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर घरेलू हिंसा के आरोप साबित नहीं हो सके।
मामले के अनुसार, रिखणीखाल क्षेत्र के कर्तिया गांव निवासी अंजलि रावत का विवाह 13 नवंबर 2013 को देहरादून निवासी अनूप सिंह रावत के साथ हुआ था। दंपती के दो बच्चे हैं। महिला ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत अदालत में प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया था कि पति और ससुराल के अन्य सदस्य छोटी-छोटी बातों पर उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज करते थे। उसने दहेज और रुपये मांगने, स्त्रीधन अपने कब्जे में रखने और बच्चों से अलग करने के भी आरोप लगाए थे।
महिला ने अपनी शिकायत में अलग-अलग तिथियों पर मारपीट होने और पुलिस से शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने की बात कही थी। वहीं, पति और ससुराल पक्ष ने इन आरोपों को नकारते हुए दावा किया कि महिला स्वयं विवाद करती थी और मुंबई जाकर मॉडलिंग व फोटोशूट कराने के लिए तीन लाख रुपये मांग रही थी। रुपये नहीं मिलने पर उसने विवाद किया और मारपीट की।
निचली अदालत ने 10 फरवरी 2026 को महिला का प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ महिला ने एडीजे कोर्ट में अपील दायर की। अपीलीय अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद पाया कि महिला अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी।