रक्षा मंत्रालय की ओर से आवास निर्माण के लिए 75 वर्ष पूर्व दी गई थी जमीन, अब वापस लेने की अटकलें
लैंसडौन। रक्षा मंत्रालय की ओर से 75 वर्ष पूर्व कर्मचारियों के आवास निर्माण के लिए डाक विभाग को दी गई भूमि पर आज तक आवास नहीं बन सके हैं। अब रक्षा मंत्रालय की ओर से भूमि के अधिग्रहण की संभावना बढ़ती जा रही है।
75 वर्ष पूर्व रक्षा मंत्रालय ने मंत्रालय के अधीन वाली सर्वे नंबर 122/1 की 0.662 एकड़, सर्वे नंबर 123/1 की 0.595 एकड़, सर्वे नंबर 156/4 की 0.744 एकड़ भूमि पोस्ट एंड टेलीग्राफ विभाग को कार्यालय व कर्मचारियों के आवास निर्माण के लिए आवंटित की थी। वर्ष 2004 में दूरसंचार व डाक विभाग की व्यवस्थाएं अलग-अलग महकमों से संचालित होने लगी थी। भूमि पोस्ट एंड टेलीग्राफ नाम से रक्षा मंत्रालय के अभिलेखों में दर्ज है। कुल भूमि 60 नाली में से डाक विभाग के हिस्से 20 नाली आई है।
डाक अधीक्षक दीपक शर्मा ने बताया कि डाक विभाग की भूमि के दस्तावेजों को मंगवा रहे हैं। दस्तावेजों के लिए छावनी परिषद से भी संपर्क किया जाएगा। प्रधान डाकघर के पोस्टमास्टर अशोक कुमार का कहना है कि प्रधान डाकघर लैंसडौन में 19 लिपिकीय व 6 डाक रनर कार्यरत हैं। इनके लिए आवास नहीं हैं।
डाक विभाग के अधीन अपनी 20 नाली भूमि है लेकिन इस भूमि का उपयोग नहीं किया जा सका है। कर्मचारियों के लिए आवास की कोई व्यवस्था नहीं होने से 15 कर्मचारी रोजाना कोटद्वार से लैंसडौन आवागमन कर रहे हैं। -महिपाल रावत, पूर्व सदस्य छावनी परिषद। (फोटो)
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कर्मचारियों के परिवार भी अन्यत्र रह रहे हैं। कर्मचारियों के परिवारों के बाहर रहने से इसका असर नगर की व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। परिवारों के रहने से राजस्व का इजाफा होगा। -मोहम्मद शाहनवाज, नगर अध्यक्ष भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ लैंसडौन। (फोटो)