कोट ब्लाक के चोपड़ी गांव की पेयजल योजना की मरम्मत में जल संस्थान की ओर से 11 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी गांव में गंभीर जल संकट बना हुआ है। योजना से पानी की आपूर्ति नहीं होने से ग्रामीणों को एक किमी दूर जल स्रोत से पानी लाना पड़ रहा है।
कोट ब्लाक के चोपड़ी गांव में पानी की दिक्कत से 25 परिवार परेशान है। गांव निवासी बृजमोहन रावत, महिताब सिंह, साबर सिंह, जगत सिंह का कहना है इस गांव के लिए असगढ़ गदेरे से बनी पेयजल योजना से सप्लाई की जाती है। इसी योजना से कल्जीखाल ब्लाक बडकोट, दियूसा, चौड़ी आदि गांवों में पानी दिया जाता है। चोपड़ी गांव इस योजना से आच्छादित अंतिम गांव है।
दो साल पहले आपदा के दौरान यह योजना काफी क्षतिग्रस्त हो गई थी। जल संस्थान की ओर से मरम्मत कराने के बाद भी योजना से सप्लाई करीब ठप है। ऐसे में लोगों को पानी के लिए एक किमी दूर जल स्रोत पर निर्भर रहना पड़ रहा है। लोगों को एक बर्तन पानी के लिए कई घंटे तक कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है। जल संस्थान के एई संजय सिंह ने बताया कि असगड़-बड़कोट-चोपड़ी योजना के स्रोत में पानी काफी कम हो गया है। चोपड़ी गांव तक बिल्कुल पानी नहीं पहुंच पा रहा है। स्रोत में पानी कम होने से यह स्थितियां बनी हुई है।
जल संस्थान के अनुसार मैठाणा, धारी, गड़कोट, भटिंडा, सत्याखाल समेत कई गांवों में भी स्रोतों पर पानी की कमी से किल्लत बनी हुई है। पाबौ ब्लाक के भैस्वाड़ा गांव में तो लोगों को गांव से आधा किलोमीटर दूर हैंडपंप में एक बाल्टी पानी के लिए तीन घंटे से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता पीके सैनी ने बताया कि संटकग्रस्त क्षेत्रों में लोगों की मांग के अनुसार पानी का टैंकर भेजा जा रहा है।