यमकेश्वर, रिखणीखाल और बीरोंखाल ब्लाक में आपदा में बहे पुलों का कई साल बाद भी निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है। लोगों को आपदा में बहे पुलों के पुनर्निर्माण का इंतजार है, लेकिन सरकारी मशीनरी में इन पुलों के निर्माण की फाइल कछुआ चाल से रेंग रही है।
यमकेश्वर, रिखणीखाल, बीरोंखाल ब्लाक में राज्य बनने के बाद आई आपदाओं के दौरान नदियों में बने पुल बह गए थे, लेकिन कई साल बाद भी विभागों ने अभी तक इन पुलों का निर्माण नहीं किया है। नदियों में पुलों के न बनने से ग्रामीण बरसात में जान जोखिम में डालकर उफनती नदियों को पार कर आवाजाही को मजबूर हैं। बीरोंखाल ब्लाक के अंतर्गत कोटद्वार-बैजरो मार्ग को ग्राम अरकंडाई सहित 6 गांव को जोड़ने वाला पैदल पुल 18 अगस्त, 2019 को भारी बरसात की भेंट चढ़ गया था। ग्रामीण हर मंच पर विधायक, सांसद, व लोनिवि बैजरो से पुल के पुनर्निर्माण की गुहार कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पूर्व प्रधान अनीता देवी का कहना है कि पुल का निर्माण न होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सालों बाद भी नहीं बना सीला पुल
यमकेश्वर ब्लाक के ग्राम पंचायत सीला में वर्ष 1958 में लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग रेंज ने सतेड़ी नदी पर मोटर पुल बनाया था, जो 2014 में बह गया था। ब्लाक के ग्राम पंचायत ठांगर के घट्टू गदेरा में वर्ष 1990 में ग्राम पंचायत निधि से बनी पुलिया भी 2014 की आपदा में बह गयी थी, जिससे पंचूर, बोरगांव, मलेथा, बिथ्याणी, दमराड़ा गांवों के स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है। एई सत्यप्रकाश ने बताया कि सीला पुल के लिए विधायक निधि से तीन लाख की धनराशि स्वीकृत हुई है, जल्द ही वैकल्पिक पैदल पुल का निर्माण कराया जाएगा।
मंदाल नदी पर नहीं बन पाया झर्तपुल
रिखणीखाल ब्लाक के अंतर्गत मंदाल नदी में बना झर्त पुल वर्ष 2010 की आपदा में बह गया था। शासन ने यहां पुल निर्माण के लिए 16.40 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है। यह पुल पूर्व में मुख्यमंत्री रहे मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी (से.नि.) और हरीश रावत की घोषणाओं में शामिल है, लेकिन अभी तक पुल नहीं बन पाया है। विश्व बैंक लोनिवि खंड पौड़ी के सहायक अभियंता प्रदीप चमोली ने बताया कि पुल के लिए भूमि विभाग को हस्तांतरित हो चुकी है। बांड बनने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।