कोटद्वार। यमकेश्वर के डाडामंडल इलाके के 14 गांवों को पेयजल मुहैया कराने वाली रणचूला पंपिंग पेयजल योजना से बिना फील्टर सीधे पेयजल आपूर्ति किए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश बना हुआ है। ग्रामीणों ने जल संस्थान को जल्द व्यवस्था में सुधार लाने का अल्टीमेटम दिया है। कहा कि जल जीवन मिशन कार्यक्रम के तहत रणचूना पंपिंग पेयजल योजना में पाइप लाइन एवं स्रोत सुदृड़ीकरण कार्य के लिए विभाग की ओर से चार करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बाद भी लोग बिना फील्टर का पानी पीने के लिए मजबूर हैं।
ग्रामीण कृष्ण कुमार कंडवाल, देवराना की पूर्व प्रधान पिंकी देवी, वंशीधर देवरानी, पूर्व बीडीसी सदस्य सुंदरदास, अमर देव देवरानी, मनोज ग्वाड़ी ने कहा कि डाडामंडल के गांवों में पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सतेड़ी नदी से कई साल पहले रणचूला पंपिंग योजना का निर्माण जल निगम की ओर से कराया गया था। वर्ष 2011 में इस योजना को जल निगम से जल संस्थान के सुपुर्द कर दिया गया। पेयजल योजना के पाइप लाइन और स्रोत सुदृढ़ीकरण के लिए वर्ष 2023 में जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार की ओर से इस योजना में करीब 4 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन कई जगहों पर पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से पानी बर्बाद हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्रोत पर पाइप बार-बार फट रहा है। ग्रामीणों ने जल जीवन मिशन का कार्य मानकों के अनुसार करने और योजना से नियमित आपूर्ति की मांग जल संस्थान से की है।
रणचूला पंपिंग पेयजल योजना से गांवों को नियमित रूप से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। योजना के सुदृढ़ीकरण के तहत इनटेक वेल का निर्माण किया गया है। जल्द ही उसे शुरू कर दिया जाएगा। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नदी के किनारे नलकूप का निर्माण भी किया गया है। जिससे पेयजल की आपूर्ति की जाती है।
-शूरवीर सिंह चौहान, अवर अभियंता जल संस्थान यमकेश्वर