मलेथा के आंदोलनकारियों ने सरकार की दोहरी नीति पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सरकार कालिख पोतने वालों पर दर्ज मुकदमे तो वापस ले रही है, लेकिन अपने हक-हकूको के लिए लड़ने वालों पर मुकदमों का बोझ बढ़ा रही है। वहीं यूकेडी ने 72 घंटों में मुकदमे वापस नहीं लेने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी है।
शुक्रवार को मलेथा आंदोलनकारियों ने यूकेडी (पी) के देवप्रयाग विधान सभा क्षेत्र के अध्यक्ष गणेश भट्ट के नेतृत्व में एसडीएम कार्यालय में सांकेतिक धरना दिया। इस मौके पर भीमपति राणा, देव सिंह, व विमला देवी कहा कि आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आंदोलनकारियों पर दायर मुकदमे वापस लेने का आश्वासन दिया था। आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार ने 11 फरवरी 2016 को जिलाधिकारी टिहरी से वरिष्ठ स्तंभकार डा. भरत झुनझुनवाला पर कालिख पोतने वालों के खिलाफ दायर मुकदमे वापस लेने का आदेश दिया है। लेकिन अपनी हक की लड़ाई लड़ने वाले आंदोलनकारियों पर मुकदमे दायर किए जा रहे हैं। वहीं यूकेडी के देवप्रयाग विधान सभा क्षेत्र के अध्यक्ष गणेश भट्ट ने सरकार को 72 घंटे में आंदोलनकारियों पर दायर मुकदमे वापस नहीं लेने पर आमरण अनशन किया जाएगा। इस अवसर पर अनिल स्वामी, जगदंबा रतूड़ी, दिनेश भट्ट, राजकुमारी, रमा देवी आदि मौजूद थे।