बीरोंखाल ब्लाक के देवकुंडई गांव में एक बार फिर दो गुलदार टहल रहे हैं जिसके कारण ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। लोग वन विभाग से गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, लेकिन मामले में वन प्रभाग लापरवाह बना हुआ है।
ग्राम प्रधान यशपाल सिंह रावत, बिमला देवी, सुरेंद्र सिंह रावत ने वन विभाग पर ग्रामीणों को खतरे में डालने का आरोप लगाया। कहा कि गांव में दो गुलदार घर के बाहर खेतों में धूम रहे हैं। जिसके कारण लोग सहमें हुए हैं। बच्चे स्कूल जाने में डर रहे हैं। शाम ढलते ही लोग अपने घरों में कैद हो रहे हैं। कई बार वन विभाग के अधिकारियों को गांव में गुलदार दिखने की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अभी तक ना तो वन कर्मी गांव पहुंचे और ना ही पिंजरा लगाया गया है। उधर, पोखड़ा रेंज अधिकारी राखी जुयाल ने बताया कि गांव में पिंजरा लगाने के लिए आला अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। इजाजत मिलते ही गांव में पिंजरा लगा दिया जाएगा।
गांव में पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
पिछले वर्ष चार अक्तूबर को खेत से घर लौट रही 11 वर्षीय राखी रावत और चार वर्षीय राघव पर गुलदार ने हमला कर दिया था। राखी ने बहादुरी का परिचय देते हुए भाई की जान बचाई थी, जिसमें वह बुरी तरह से घायल हो गई। तब वन विभाग ने गांव में पिंजरा लगाकर दो गुलदारों को पकड़ा था। इसके बाद आठ दिसंबर को अपनी मां के साथ गोशाला में गए नौ साल के मासूम अनिकेत को गुलदार ने मार डाला था। बच्चे की मौत के बाद वन विभाग ने गुलदार को आदमखोर घोषित कर उसे मारने के लिए दो शिकारियों को गांव में तैनात किया। शिकारियों ने 26 दिसंबर को आमदखोर गुलदार को मार डाला था। गुलदार के मारे जाने के एक सप्ताह बाद से ही गांव में दो अन्य गुलदारों के सक्रिय होने से लोगों में दहशत छा गई है।