सिंचाई विभाग की लापरवाही का खामियाजा यमकेश्वर ब्लाक की ग्रामपंचायत बिथ्याणी और ग्राम पंचायत सीला के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। ब्लाक की नहरों में पानी की व्यवस्था कर खेतों को सिंचित करने के दावे करने वाले सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली का आलम यह है कि आपदा के दो वर्ष बाद भी सिंचाई नहरों की मरम्मत नहीं की गई है। इसके कारण किसानों की उपजाऊ भूमि बंजर होने की कगार पर है, ग्रामीणों को भरण-पोषण की चिंता सताने लगी है।
वर्ष 2014 में यमकेश्वर में आई आपदा के समय यमकेेश्वर ब्लाक की अधिकतर नहरें क्षतिग्रस्त हो गयी थी। उनमें राजसेरा नहर, लोअर सीला नहर और अपर सीला नहर आदि भी शामिल थी। विभाग ने राजसेरा और लोअर सीला नहर तो थोड़ा बहुत काम करा दिया। लेकिन अपर सीला नहर की मरम्मत कराना भूल गया। वर्तमान नहर की हालत यह है कि जगह-जगह नहर क्षतिग्रस्त होने के कारण पानी बर्बाद हो रहा है जिससे पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
ग्राम प्रधान सीला आशीष रतूड़ी और क्षेत्र पंचायत सदस्य सीला महावीर सिंह ने सिंचाई विभाग पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि बीडीसी की बैठकों में नहरों की स्थिति को सुधारने के लिये कई बार प्रस्ताव भी रखा, लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारियों के द्वारा हर बार विभाग के पास बजट नहीं होने की बात कहकर कार्य नही किया। नहरों में पानी नहीं आने से लोगों ने खेतों को छोड़ना शुरू कर दिया है जिससे खेत बंजर होने लगे हैं। सिंचाई नहरों की स्थिति खराब होने से लोगों को बारिश पर ही निर्भर होना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों के सामने धान की रोपाई करने की समस्या होने लगी है।
सिंचाई विभाग के अवर अभियंता अमित घिल्डियाल ने बताया कि अपर सीला नहर के लिये नाबार्ड और शासन को बजट के लिये भेजा गया था, शासन से बजट की स्वीकृति मिलते ही नहर पर कार्य करा दिया जाएगा।