कोटद्वार। राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार में ऑपरेशन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग स्थायी निश्चेतक की व्यवस्था नहीं जुटा सका है। रुद्रप्रयाग से कोटद्वार के लिए स्थानांतरित किए गए स्थायी निश्चेतक ने एक पखवाड़े बाद भी कार्यभार नहीं संभाला है। थलीसैंण से अस्पताल से संबद्ध की गईं एकमात्र निश्चेतक पर ऑपरेशन का दारोमदार है। इसके अलावा चिकित्सकों के अभाव से भी चिकित्सीय सेवाएं प्रभावी नहीं हो पा रही हैं।
राजकीय बेस अस्पताल में लंबे समय तक कार्यरत रहे निश्चेतक डॉ. एसडी आर्य 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए थ। तब से अस्पताल में स्थायी निश्चेतक की कमी बनी है। बीच में जिला चमोली के पांच निश्चेतकों का 10-10 दिन रोस्टर बनाकर अस्थायी तैनाती की गई थी। अवधि पूर्ण होने पर फिर से ऑपरेशन व्यवस्था चरमराने पर मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से निश्चेतकों का प्रबंध किया गया।
लंबे इंतजार के बाद जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग के निश्चेतक डॉ. निर्देश कुमार का स्थानांतरण राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार के लिए किए जाने से कोटद्वार में स्थायी निश्चेतक की कमी पूरी होने की उम्मीद बंधी थी, लेकिन 18 दिन बाद भी निश्चेतक ने कोटद्वार पहुंचकर अपना कार्यभार ग्रहण नहीं किया।
गनीमत रही कि थलीसैंण अस्पताल से निश्चेतक डॉ. मोनिका खाती को पहले से ही बेस अस्पताल से ही संबद्ध कर रखा था। जिससे अस्पताल में ऑपरेशन संभव हो पा रहे हैं। अस्पताल में ऑपरेशन की स्थिति तो फिलहाल सामान्य है, लेकिन कई चिकित्सकों का अभाव होने से चिकित्सीय सेवाएं प्रभावित हैं। अस्पताल में चिकित्सकों के 58 पद स्वीकृत हैं, जबकि केवल 19 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। निश्चेतक के पांच पदों में से एकमात्र निश्चेतक को संबद्ध किया हुआ है। पांच फिजिशियन में से एकमात्र तैनात हैं। इसी तरह कुछ अन्य सेवाएं प्रभावित हैं।
निश्चेतक के ज्वाइन नहीं करने के अलावा चिकित्सकों की कमी आदि व्यावहारिक समस्याओं एवं अभाव से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष से भी इस संबंध में भेंट की गई थी।
-डॉ. राजीव सिंह पाल, सीएमएस, बेस अस्पताल कोटद्वार